by-Ravindra Sikarwar
भोपाल: मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित पैलंपियन कपिल परमार ने राज्य सरकार से नौकरी विवाद के चलते अपना सर्वोच्च खेल सम्मान अर्जुन पुरस्कार लौटाने का फैसला किया है। उनका यह कदम खेल जगत में हड़कंप मचाने वाला है और यह खिलाड़ियों के प्रति सरकारी उदासीनता पर एक गंभीर सवाल उठाता है।
क्या है पूरा मामला?
कपिल परमार, जो एक अंतर्राष्ट्रीय पैलंपियन हैं और जिन्होंने देश के लिए कई पदक जीते हैं, पिछले कई सालों से मध्य प्रदेश सरकार से सरकारी नौकरी की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि सरकार ने उन्हें नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उनकी अनदेखी की गई।
परमार ने आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें खेल कोटे के तहत नौकरी देने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह वादा कभी पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री और खेल मंत्री से मुलाकात की, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिले। इस उपेक्षा से निराश होकर उन्होंने अपना अर्जुन पुरस्कार लौटाने का कठिन फैसला लिया है।
कपिल परमार का करियर और उपलब्धियाँ:
कपिल परमार ने पैलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं। वह अपनी शारीरिक अक्षमता के बावजूद अपनी मेहनत और लगन से देश का नाम रोशन करते रहे हैं। उनका अर्जुन पुरस्कार, जो उन्हें 2021 में मिला था, उनकी उपलब्धियों का एक प्रमाण है।
सरकार की प्रतिक्रिया:
इस मामले पर अभी तक मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, खेल विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि वे मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही इस पर कोई समाधान निकाला जाएगा।
खेल जगत में नाराजगी:
कपिल परमार के इस फैसले ने अन्य खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को निराश किया है। कई खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया पर परमार के समर्थन में आवाज उठाई है और सरकार से अपील की है कि खिलाड़ियों के सम्मान की रक्षा की जाए और उन्हें उचित सम्मान और अवसर दिए जाएं। यह घटना इस बात पर जोर देती है कि खिलाड़ियों को केवल पदक जीतने के बाद ही नहीं, बल्कि उनके करियर के दौरान भी समर्थन और प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है।
