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by-Ravindra Sikarwar

बीजिंग: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन हाल ही में बीजिंग में संपन्न हुआ, जो कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। इस सम्मेलन में जहां एक ओर चीन ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर भारत की विदेश नीति और उसके रुख में संभावित बदलाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहन चर्चा हुई।

चीन की सैन्य परेड और शक्ति प्रदर्शन:
सम्मेलन की शुरुआत चीन द्वारा आयोजित एक भव्य सैन्य परेड के साथ हुई, जिसमें चीन की अत्याधुनिक सैन्य क्षमताओं को दर्शाया गया। इस परेड का उद्देश्य न केवल एससीओ के सदस्य देशों को अपनी सैन्य ताकत दिखाना था, बल्कि यह भी संकेत देना था कि चीन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

परेड में शामिल अत्याधुनिक मिसाइलें, ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरण ने दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया। विश्लेषकों का मानना है कि यह शक्ति प्रदर्शन अमेरिका और उसके सहयोगियों को एक स्पष्ट संदेश था।

भारत की विदेश नीति और संभावित बदलाव:
भारत की भूमिका इस सम्मेलन में विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। भारत ने एससीओ के मंच का उपयोग आतंकवाद, सीमा पार अपराध और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखने के लिए किया। हालांकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि भारत ने कुछ विवादास्पद मुद्दों पर अपने पारंपरिक रुख में थोड़ी नरमी दिखाई है।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भारत, चीन और रूस के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है, खासकर जब से अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ उसके संबंध मजबूत हुए हैं। भारत की विदेश नीति में यह बदलाव एक रणनीतिक कदम हो सकता है ताकि वह बहुध्रुवीय दुनिया में अपने हितों की रक्षा कर सके।

प्रमुख चर्चाएं और समझौते:
सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:

  • आतंकवाद विरोधी सहयोग: सभी सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा: अफगानिस्तान में स्थिरता और मध्य एशिया में सुरक्षा चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया गया।
  • आर्थिक सहयोग: व्यापार, ऊर्जा और परिवहन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

कुल मिलाकर, एससीओ शिखर सम्मेलन ने चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति और भारत की बदलती विदेश नीति को उजागर किया। यह सम्मेलन भविष्य में इन देशों के बीच संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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