by-Ravindra Sikarwar
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटील का विरोध प्रदर्शन एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर रहा है। उनकी मुंबई में होने वाली विशाल रैली ने प्रशासन और पुलिस के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिसके चलते शहर में यातायात को लेकर कई एडवाइजरी और प्रतिबंध जारी किए गए हैं।
विरोध का कारण और मुख्य मांगें:
मनोज जरांगे पाटील कई महीनों से मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के तहत आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि मराठा समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है और उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। वह यह भी मांग कर रहे हैं कि उन मराठाओं को कुनबी जाति प्रमाणपत्र दिए जाएं जिनके पास निजाम काल के रिकॉर्ड हैं, ताकि वे ओबीसी के रूप में आरक्षण का लाभ उठा सकें।
मुंबई में विरोध प्रदर्शन और यातायात पर असर:
जरांगे पाटील ने अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए मुंबई में एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस प्रदर्शन में राज्य भर से लाखों मराठाओं के शामिल होने की उम्मीद है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है। मुंबई पुलिस ने विभिन्न मार्गों पर यातायात एडवाइजरी जारी की है और कई सड़कों को बंद कर दिया है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
- प्रमुख मार्ग प्रभावित: प्रदर्शन के कारण, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न एक्सप्रेसवे और वेस्टर्न एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ है।
- सुरक्षा व्यवस्था: किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए मुंबई में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
- स्कूल और कार्यालय: कुछ क्षेत्रों में स्कूलों को बंद कर दिया गया है और कई कार्यालयों ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की सलाह दी है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया:
मनोज जरांगे के इस आंदोलन ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सरकार इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रही है, लेकिन जरांगे अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं। विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार पर हमलावर है और मराठा समुदाय को न्याय दिलाने की मांग कर रहा है। यह आंदोलन अब केवल आरक्षण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक बन गया है।
