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by-Ravindra Sikarwar

अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कुछ चुनिंदा सामानों पर 50% का टैरिफ (आयात शुल्क) लगा दिया है, जो 27 अगस्त, 2025 से प्रभावी हो गया है। यह कदम भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद जारी रखने के जवाब में उठाया गया है। पहले से लागू 25% टैरिफ में 25% का अतिरिक्त जुर्माना शुल्क जोड़ दिया गया है, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया है।

प्रमुख कारण और प्रतिक्रिया:
यह टैरिफ मुख्य रूप से रूसी तेल खरीदने के भारत के फैसले से जुड़ा हुआ है। अमेरिका का मानना है कि रूस से तेल खरीद कर भारत यूक्रेन में चल रहे युद्ध को वित्तीय सहायता दे रहा है, जबकि भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्र हित को प्राथमिकता देगा और जहां से उसे सबसे अच्छी डील मिलेगी, वहां से तेल खरीदेगा। भारत ने अमेरिका के इस कदम को ‘अनुचित और अतार्किक’ बताया है और जोर देकर कहा है कि वह दबाव में नहीं झुकेगा।

प्रभावित क्षेत्र और संभावित असर:
इस टैरिफ का सबसे ज़्यादा असर उन क्षेत्रों पर पड़ेगा जो श्रम-प्रधान (labor-intensive) हैं और जिनका अमेरिका को बड़ा निर्यात होता है।

  • वस्त्र और परिधान: इस पर 64% तक का टैरिफ लग सकता है, जिससे भारत के बड़े टेक्सटाइल हब जैसे तिरुपुर, नोएडा-गुरुग्राम और जयपुर को भारी नुकसान हो सकता है।
  • रत्न और आभूषण: इस क्षेत्र के निर्यात पर भी बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि इसका एक बड़ा हिस्सा अमेरिका जाता है।
  • अन्य: समुद्री भोजन (विशेषकर झींगा), चमड़े के उत्पाद, जूते, कालीन, हस्तशिल्प और फर्नीचर जैसे उत्पाद भी बुरी तरह प्रभावित होंगे।

इस टैरिफ से भारत का निर्यात लगभग 40% तक गिर सकता है, जिससे करीब 37 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, यह भारत की आर्थिक वृद्धि को 30 से 80 बेसिस पॉइंट तक कम कर सकता है। हालांकि, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा जैसे कुछ क्षेत्रों पर इस टैरिफ का कोई असर नहीं पड़ेगा।

भारत के लिए आगे की राह:
इस चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार ने निर्यातकों के साथ मिलकर एक योजना बनाई है।

  • निर्यात बाजारों का विविधीकरण (Diversification): भारत चीन, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व जैसे नए बाजारों में अपने निर्यात को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
  • घरेलू सुधार: सरकार निर्यात-केंद्रित कंपनियों को आर्थिक मदद देगी और घरेलू सुधारों को गति देगी ताकि वे प्रतिस्पर्धी बने रहें।
  • कूटनीतिक बातचीत: भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे को सुलझाने के लिए बातचीत जारी है। अमेरिकी वित्त मंत्री ने भी संकेत दिया है कि दोनों देश अंततः एक समझौते पर पहुंच सकते हैं।

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