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by-Ravindra Sikarwar

सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात में स्थित वन्यजीव पुनर्वास केंद्र ‘वनतारा’ की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है। यह जाँच दल इस बात की पड़ताल करेगा कि यह केंद्र जानवरों का अधिग्रहण किस तरह करता है और क्या इस प्रक्रिया में सभी कानूनी नियमों का पालन किया गया है।

क्या है ‘वनतारा’ और जाँच की वजह?
‘वनतारा’ (Vantara), जिसका अर्थ है ‘जंगल का तारा’, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा चलाया जाने वाला एक बड़ा वन्यजीव पुनर्वास केंद्र है। इसका संचालन अनंत अंबानी करते हैं। इस केंद्र का उद्देश्य भारत और दुनिया भर के संकटग्रस्त और घायल जानवरों को बचाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें देखभाल प्रदान करना है।

इस केंद्र की स्थापना के बाद से ही, इसके द्वारा जानवरों को प्राप्त करने के तरीकों पर कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने सवाल उठाए थे। इन चिंताओं को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया और एक स्वतंत्र जाँच का आदेश दिया।

SIT के जाँच के मुख्य बिंदु:
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित यह SIT मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करेगी:

  • अधिग्रहण की कानूनी वैधता: यह जाँच की जाएगी कि क्या ‘वनतारा’ ने जानवरों को हासिल करने के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और वन्य जीवों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर लागू होने वाले CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) जैसे कानूनों का पालन किया है।
  • जानवरों का स्रोत: SIT यह पता लगाएगी कि केंद्र में लाए गए जानवर कहाँ से आए हैं—क्या वे भारत के भीतर से हैं या उन्हें अन्य देशों से आयात किया गया है?
  • दस्तावेज़ीकरण: जाँच दल सभी जानवरों से संबंधित कानूनी दस्तावेजों और परमिटों की जाँच करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अवैध व्यापार तो नहीं हुआ है।

न्यायालय का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि निजी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे अच्छे कार्यों में भी पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन हो। इस जाँच के नतीजे यह तय करेंगे कि ‘वनतारा’ के संचालन को लेकर उठे सभी सवाल कितने सही हैं।

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