by-Ravindra Sikarwar
भोपाल, मध्य प्रदेश: भोपाल में जिला प्रशासन द्वारा दो मस्जिदों के लिए विध्वंस (demolition) नोटिस जारी किए जाने के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन का दावा है कि ये मस्जिदें अवैध रूप से बनाई गई हैं, जबकि मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने इस आदेश को चुनौती दी है और इसे कानूनी रूप से लड़ने की चेतावनी दी है।
प्रशासन का तर्क और नोटिस का विवरण:
जिला प्रशासन ने ये नोटिस भोपाल के पुराने शहर के इब्राहिमपुरा और कसाई मंडी इलाके में स्थित मस्जिदों को जारी किए हैं। प्रशासन का कहना है कि ये दोनों मस्जिदें सरकारी जमीन पर बिना अनुमति के बनाई गई हैं, जिससे अतिक्रमण हुआ है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि इन मस्जिदों के कारण सार्वजनिक रास्ता बाधित हो रहा है।
प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए की जा रही है, जिसके तहत सार्वजनिक भूमि से अवैध ढांचों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में मस्जिद प्रबंधन से 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है कि क्यों न इन ढांचों को ध्वस्त कर दिया जाए।
वक्फ बोर्ड का कड़ा विरोध:
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई पर मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने कड़ा विरोध जताया है। बोर्ड के अध्यक्ष ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ये मस्जिदें सैकड़ों साल पुरानी हैं और इनका निर्माण किसी भी तरह से अवैध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ये मस्जिदें वक्फ की संपत्ति हैं और उनके पास इसके मालिकाना हक के दस्तावेज भी मौजूद हैं।
वक्फ बोर्ड ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण है और जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि बोर्ड इस नोटिस को अदालत में चुनौती देगा और कानूनी रूप से इसका पुरजोर विरोध करेगा।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया:
इस विवाद ने भोपाल की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। कई मुस्लिम संगठनों और धार्मिक नेताओं ने इस कार्रवाई की निंदा की है और इसे “अन्यायपूर्ण” बताया है। उन्होंने सरकार से तुरंत इस नोटिस को वापस लेने की मांग की है।
वहीं, कुछ हिंदू संगठनों ने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन किया है और कहा है कि कानून सभी के लिए समान है और अवैध कब्जों को हटाया जाना चाहिए। इस तनावपूर्ण माहौल में, पुलिस ने दोनों इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
