by-Ravindra Sikarwar
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने भारत की गणितीय विरासत पर एक मोनोग्राफ, जिसका शीर्षक “भारतीय गणित परंपरा” है, प्रकाशित करने का फैसला किया है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को प्राचीन भारतीय गणितज्ञों के योगदान से परिचित कराना और गणित के प्रति उनकी रुचि बढ़ाना है।
मोनोग्राफ का मुख्य उद्देश्य:
इस मोनोग्राफ के जरिए CBSE का लक्ष्य केवल ऐतिहासिक जानकारी देना नहीं है, बल्कि यह भी दिखाना है कि गणित कैसे भारतीय संस्कृति, दर्शन और विज्ञान का अभिन्न अंग रहा है। यह पुस्तक बताएगी कि गणित की जटिल अवधारणाएँ हमारे देश में कैसे विकसित हुईं और उनका दैनिक जीवन में क्या उपयोग था।
- प्रेरणादायक विरासत: छात्रों को यह जानकारी मिलेगी कि किस तरह भारत के गणितज्ञों ने पूरी दुनिया के लिए गणित की नींव रखी। इससे छात्रों में अपनी विरासत के प्रति गौरव और गणित के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का अनुपालन: यह पहल NEP 2020 के अनुरूप है, जो भारतीय ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर जोर देती है। यह मोनोग्राफ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्या होगा मोनोग्राफ में खास?
यह मोनोग्राफ कई मायनों में खास होगा और यह सिर्फ एक पाठ्यपुस्तक की तरह नहीं होगा, बल्कि एक आकर्षक और सूचनात्मक दस्तावेज होगा।
- महान गणितज्ञों का परिचय: इसमें आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, और भास्कराचार्य जैसे महान गणितज्ञों के जीवन और उनके प्रमुख कार्यों का उल्लेख होगा। यह बताया जाएगा कि उन्होंने शून्य, बीजगणित, त्रिकोणमिति और दशमलव प्रणाली जैसी अवधारणाओं को कैसे विकसित किया।
- विभिन्न क्षेत्रों में गणित का अनुप्रयोग: मोनोग्राफ में यह भी बताया जाएगा कि गणित का उपयोग प्राचीन भारत में ज्योतिष, खगोल विज्ञान, वास्तुकला (मंदिरों और इमारतों के निर्माण में), और यहां तक कि संगीत में भी कैसे होता था।
- आकर्षक और सरल भाषा: जटिल गणितीय सिद्धांतों को सरल और सुलभ भाषा में समझाया जाएगा ताकि हर छात्र उसे आसानी से समझ सके। इसमें चित्रों और उदाहरणों का भी भरपूर उपयोग होगा।
यह मोनोग्राफ भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक नया आयाम जोड़ेगा और यह साबित करेगा कि भारत केवल आधुनिक तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि ज्ञान की एक प्राचीन और समृद्ध परंपरा का वाहक भी है।
