by-Ravindra Sikarwar
भारतीय संसद ने हाल ही में तटीय जहाजरानी विधेयक, 2025 (Coastal Shipping Bill, 2025) को पारित कर दिया है। यह विधेयक भारत के तटीय क्षेत्रों में जहाजरानी और समुद्री व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाया गया है। इस ऐतिहासिक कदम को देश की आर्थिक वृद्धि और समुद्री परिवहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान:
इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान हैं, जिनका उद्देश्य तटीय जहाजरानी को अधिक कुशल, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाना है।
- भारतीय जहाजों को प्राथमिकता: विधेयक भारतीय जहाजों को तटों के बीच माल और यात्री परिवहन के लिए प्राथमिकता देता है। इसका मकसद भारतीय जहाजरानी कंपनियों को प्रोत्साहित करना और विदेशी जहाजों पर निर्भरता कम करना है।
- सरल नियामक ढाँचा: विधेयक पुराने और जटिल नियमों को सरल बनाता है। यह जहाजों के पंजीकरण, लाइसेंसिंग और परिचालन के लिए एक पारदर्शी और सुव्यवस्थित प्रक्रिया स्थापित करता है, जिससे व्यापार करना आसान होगा।
- पर्यावरण संरक्षण: इस विधेयक में पर्यावरणीय मानकों को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य समुद्री प्रदूषण को कम करना और टिकाऊ जहाजरानी प्रथाओं को बढ़ावा देना है।
- तकनीकी उन्नयन: विधेयक में जहाजरानी क्षेत्र में नई तकनीकों और डिजिटलीकरण को अपनाने पर जोर दिया गया है। इससे परिचालन की दक्षता बढ़ेगी और लागत में कमी आएगी।
- सुरक्षा मानक: समुद्री सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। इसमें जहाजों और बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
आर्थिक प्रभाव और लाभ:
इस विधेयक के दूरगामी आर्थिक लाभ होने की उम्मीद है।
- लागत में कमी: तटीय जहाजरानी को बढ़ावा देने से माल ढुलाई की लागत कम होगी, जिससे व्यवसायों को फायदा होगा। यह सड़क और रेल परिवहन पर बोझ को भी कम करेगा।
- रोजगार सृजन: जहाजरानी क्षेत्र के विस्तार से बंदरगाहों, जहाजों और सहायक उद्योगों में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- व्यापार में वृद्धि: बेहतर तटीय परिवहन व्यवस्था से घरेलू व्यापार में वृद्धि होगी, खासकर तटीय राज्यों के बीच।
- ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा: यह विधेयक भारत में जहाज निर्माण उद्योग को भी प्रोत्साहित करेगा, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल को और मजबूत करेगा।
इस विधेयक का पारित होना भारत को एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल आर्थिक विकास को गति देगा, बल्कि देश की समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ाएगा।
