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by-Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश में ‘लव जिहाद’ के मामलों को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। एक हालिया विधानसभा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में साल 2020 से अब तक 283 ‘लव जिहाद’ के मामले दर्ज किए गए हैं। यह आँकड़ा राज्य में धर्म परिवर्तन और जबरन विवाह से जुड़े मामलों की गंभीरता को दर्शाता है।

‘लव जिहाद’ कानून और उसके प्रावधान:
इन मामलों को मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2021 के तहत दर्ज किया गया है। यह कानून जबरन या धोखे से किए गए धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए बनाया गया था। इसके प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं:

  • जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक: किसी भी व्यक्ति को बहकावे, दबाव, या जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने पर 1 से 5 साल की कैद और 25,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
  • नाबालिगों के मामले: अगर पीड़ित नाबालिग है तो सजा 2 से 10 साल तक की कैद और 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
  • सामूहिक धर्म परिवर्तन: अगर किसी समूह द्वारा जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाता है तो 5 से 10 साल की कैद और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
  • विवाह के लिए धर्म परिवर्तन: शादी के उद्देश्य से किया गया धर्म परिवर्तन अमान्य माना जाएगा।
  • सहमति से धर्म परिवर्तन: अगर कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपना धर्म बदलना चाहता है तो उसे जिला मजिस्ट्रेट को 60 दिन पहले सूचित करना अनिवार्य है।

रिपोर्ट के मायने:
यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश में ‘लव जिहाद’ के मामलों की एक विस्तृत तस्वीर पेश करती है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इस कानून का दुरुपयोग भी हो सकता है। सरकार का तर्क है कि यह कानून महिलाओं को जबरन धर्म परिवर्तन से बचाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए जरूरी है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो सकती है, जहाँ एक तरफ सरकार अपने कानून को सही ठहराएगी, वहीं विपक्ष इस पर सवाल उठा सकता है। यह मामला दिखाता है कि धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।

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