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by-Ravindra Sikarwar

भोपाल, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना ने राज्य पुलिस बल में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक फेरबदल किया है। पुलिस व्यवस्था में सुधार, निष्पक्ष कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से, डीजीपी के निर्देश पर पिछले एक सप्ताह में पूरे प्रदेश में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मियों के तबादले किए गए हैं। इसे मध्य प्रदेश पुलिस के इतिहास की सबसे बड़ी सर्जरी माना जा रहा है।

“अंगद के पैर” हिलाए: वर्षों से जमे कर्मियों को हटाया गया
डीजीपी कैलाश मकवाना के इस कदम को “पुलिस महकमे के 10 हजार अंगद के पैर हिला दिए” के रूप में वर्णित किया जा रहा है। इसका सीधा अर्थ है कि उन पुलिसकर्मियों को उनके वर्तमान स्थान से हटा दिया गया है, जो पाँच वर्ष से अधिक समय से एक ही पुलिस थाने में जमे हुए थे। इस तरह के स्थानांतरण अक्सर अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानीय प्रभाव को कम करने, नए दृष्टिकोण लाने और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम करने के लिए किए जाते हैं।

पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, ये सभी स्थानांतरित पुलिसकर्मी अगले एक सप्ताह के भीतर अपने नए थानों पर ज्वाइन हो जाएंगे। इस तेजी से हो रही प्रक्रिया से पता चलता है कि डीजीपी इस बदलाव को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं।

टॉप पाँच जिलों में सबसे अधिक तबादले:
यह व्यापक स्थानांतरण अभियान पूरे राज्य में फैला हुआ है, लेकिन कुछ जिलों में विशेष रूप से बड़ी संख्या में तबादले किए गए हैं। सबसे अधिक तबादले वाले शीर्ष पांच जिले इस प्रकार हैं:

  1. इंदौर नगरीय: 1,029 पुलिसकर्मी
  2. ग्वालियर: 828 पुलिसकर्मी
  3. भोपाल नगरीय: 699 पुलिसकर्मी
  4. जबलपुर: 535 पुलिसकर्मी
  5. नर्मदापुरम: 372 पुलिसकर्मी

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बड़े और संवेदनशील शहरी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जहाँ पुलिस की कार्यप्रणाली का सीधा प्रभाव आम जनता पर पड़ता है।

आपराधिक रिकॉर्ड और विभागीय जांच वाले कर्मियों पर भी गाज:
इस बड़े फेरबदल के साथ ही, डीजीपी मकवाना ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया है: आपराधिक रिकॉर्ड वाले और विभागीय जांच का सामना कर रहे पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को भी पुलिस थानों से हटाने के लिए कहा गया है। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि जनता के साथ सीधे संपर्क में आने वाले पुलिसकर्मी बेदाग हों और उनकी साख पर कोई सवाल न हो। इससे पुलिस की छवि और कार्यप्रणाली पर जनता का विश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कड़ी निगरानी और पारदर्शिता का लक्ष्य:
पुलिस मुख्यालय (PHQ) स्तर से इन निर्देशों के पालन की कड़ी मॉनिटरिंग भी की जा रही है। इसका मतलब है कि केवल तबादले करके ही काम खत्म नहीं होगा, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी आदेशों का सही ढंग से पालन हो और नई व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू हो। यह निगरानी यह भी सुनिश्चित करेगी कि तबादलों में कोई अनियमितता न हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।

डीजीपी कैलाश मकवाना का यह कदम मध्य प्रदेश पुलिस को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनता के प्रति जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह दिखाता है कि पुलिस नेतृत्व राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुधारने और पुलिस बल के भीतर सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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