by-Ravindra Sikarwar
आज, 19 जून, 2025 को भारत के चार राज्यों – गुजरात, पश्चिम बंगाल, पंजाब और केरल – की पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। ये उपचुनाव न केवल संबंधित राज्यों की राजनीतिक नब्ज को दर्शाते हैं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए अपनी ताकत का प्रदर्शन करने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर हैं।
ये उपचुनाव उन सीटों पर हो रहे हैं जो विधायकों के इस्तीफे, निधन या लोकसभा चुनाव जीतने के कारण खाली हुई हैं। इन चुनावों के नतीजे अक्सर राज्य और कभी-कभी राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
आइए, इन राज्यों में हो रहे उपचुनावों और उनके महत्व पर विस्तृत नज़र डालते हैं:
1. गुजरात: वडोदरा जिले की वाघोडिया सीट
- पृष्ठभूमि: वाघोडिया सीट पर यह उपचुनाव पूर्व विधायक मधु श्रीवास्तव के निधन के कारण हो रहा है। मधु श्रीवास्तव एक प्रभावशाली नेता थे, जिनका इस क्षेत्र में अच्छा खासा जनाधार था, और उनकी अनुपस्थिति से इस सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
- प्रमुख दावेदार:
- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): भाजपा इस सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। यह सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है, खासकर 2024 के लोकसभा चुनावों में गुजरात में अपनी शानदार जीत के बाद, जहाँ उन्होंने सभी सीटें जीती थीं। वे दिवंगत विधायक के प्रभाव और अपनी मजबूत सांगठनिक क्षमता पर निर्भर कर रहे हैं।
- कांग्रेस: कांग्रेस इस सीट पर वापसी की उम्मीद कर रही है। वे स्थानीय मुद्दों जैसे कि पानी की कमी, ग्रामीण विकास और महंगाई जैसे राष्ट्रीय मुद्दों को उठाकर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। यह कांग्रेस के लिए अपनी प्रासंगिकता साबित करने का मौका है।
- अन्य: कुछ निर्दलीय उम्मीदवार और छोटे क्षेत्रीय दल भी मैदान में हैं, जो मुख्य पार्टियों के वोटों को बांट सकते हैं, जिससे परिणाम अप्रत्याशित हो सकता है।
- महत्व: यह उपचुनाव भाजपा के लिए यह सुनिश्चित करने का अवसर है कि वह राज्य में अपनी मजबूत स्थिति और जनसमर्थन बनाए रखे, जबकि कांग्रेस के लिए यह अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने और राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का एक महत्वपूर्ण मौका है।
2. पश्चिम बंगाल: कूचबिहार जिले की दिनहाटा सीट
- पृष्ठभूमि: दिनहाटा सीट पर उपचुनाव स्थानीय विधायक के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद खाली हुई है। यह सीट तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का गढ़ मानी जाती है और उत्तरी बंगाल में टीएमसी के प्रभाव को दर्शाती है।
- प्रमुख दावेदार:
- तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी): टीएमसी इस सीट पर अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद अप्रत्यक्ष रूप से प्रचार में हिस्सा लिया है और पार्टी के वरिष्ठ नेता सक्रिय रहे हैं, जो इस सीट के महत्व को दर्शाता है। वे अपने विकास कार्यों और स्थानीय लोगों से जुड़ाव पर जोर दे रहे हैं।
- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रही है, खासकर उत्तर बंगाल के क्षेत्रों में जहां उनकी लोकसभा में अच्छी सीटें आई थीं। वे टीएमसी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था की स्थिति और राजनीतिक हिंसा के मुद्दों को उठा रहे हैं।
- वाम मोर्चा और कांग्रेस: ये दल भी अपने उम्मीदवारों के साथ मैदान में हैं, हालांकि उनकी चुनौती अपेक्षाकृत कमजोर दिख रही है, लेकिन वे टीएमसी और भाजपा के वोटों में सेंध लगा सकते हैं।
- महत्व: यह उपचुनाव टीएमसी के लिए अपनी राजनीतिक ताकत को मजबूत करने और भाजपा के लिए राज्य में अपनी पैठ बनाने तथा 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार करने का एक महत्वपूर्ण मंच है।
3. पंजाब: जालंधर पश्चिम और एक अन्य सीट (कुल 2 सीटें)
- पृष्ठभूमि: पंजाब में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। इनमें से एक जालंधर पश्चिम सीट है, जो विधायक के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद खाली हुई है। दूसरी सीट भी विधायक के निधन या इस्तीफे के कारण खाली हुई है (विवरण के लिए, कृपया चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी देखें)।
- प्रमुख दावेदार:
- आम आदमी पार्टी (आप): सत्ताधारी आप इन सीटों को जीतकर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। वे अपनी सरकार के कल्याणकारी योजनाओं, बिजली सब्सिडी, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादों पर भरोसा कर रहे हैं। यह उनके लिए जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता को फिर से साबित करने का मौका है।
- कांग्रेस: कांग्रेस पंजाब में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है। वे आप सरकार की कथित विफलताओं और केंद्र की नीतियों को निशाना बना रहे हैं।
- शिरोमणि अकाली दल (शिअद): शिअद भी इन उपचुनावों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहा है ताकि राज्य की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता को फिर से स्थापित किया जा सके।
- भाजपा: भाजपा भी पंजाब में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रही है, खासकर अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद। वे शहरी मतदाताओं और गैर-सिख आबादी पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
- महत्व: ये उपचुनाव पंजाब में आप सरकार के प्रदर्शन पर एक जनमत संग्रह के रूप में देखे जा सकते हैं। इनके नतीजे राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, विशेषकर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले।
4. केरल: कोल्लम जिले की चवारा सीट
- पृष्ठभूमि: चवारा सीट पर उपचुनाव स्थानीय विधायक के निधन के कारण हो रहा है। यह सीट राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसमें वामपंथी और कांग्रेस-नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जाती है।
- प्रमुख दावेदार:
- वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ): केरल में सत्ताधारी एलडीएफ (मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में) इस सीट को जीतकर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है। वे अपनी सरकार के विकास कार्यों और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर जोर दे रहे हैं।
- संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ): कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ इस सीट पर जीत दर्ज कर एलडीएफ को चुनौती देना चाहता है। वे राज्य सरकार की कथित विफलताओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं।
- भाजपा: भाजपा भी केरल में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए प्रयासरत है, खासकर 2024 के लोकसभा चुनावों में तिरुवनंतपुरम जैसी सीटों पर उनके अच्छे प्रदर्शन के बाद। हालांकि, उनकी चुनौती अभी भी अपेक्षाकृत कम है, लेकिन वे त्रिकोणीय मुकाबले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
- महत्व: यह उपचुनाव केरल में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच चल रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का एक और अध्याय है। इसका परिणाम आगामी विधानसभा चुनावों के लिए दोनों प्रमुख गठबंधनों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
इन उपचुनावों का व्यापक महत्व
ये उपचुनाव केवल स्थानीय स्तर के चुनाव नहीं हैं, बल्कि इनके कई व्यापक निहितार्थ हैं:
- राजनीतिक दलों का शक्ति प्रदर्शन: ये चुनाव विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए अपनी संगठनात्मक ताकत, जमीनी पहुंच और मतदाताओं को लामबंद करने की क्षमता का परीक्षण करने का अवसर हैं। यह बताता है कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद कौन सा दल अपनी ऊर्जा और प्रभाव को बरकरार रखने में सफल रहा है।
- जनता का मूड: इन उपचुनावों के नतीजे वर्तमान सरकारों के प्रदर्शन और विपक्ष की विश्वसनीयता पर जनता के मूड का संकेत दे सकते हैं।
- रणनीतिक परीक्षण: पार्टियां इन उपचुनावों का उपयोग अपनी चुनावी रणनीतियों, प्रचार अभियानों और गठबंधन की संभावनाओं का परीक्षण करने के लिए कर सकती हैं। यह भविष्य के बड़े चुनावों के लिए एक तरह का ‘टेस्ट रन’ है।
- 2029 की तैयारी: ये चुनाव 2029 के लोकसभा चुनावों और संबंधित राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक पूर्वाभ्यास के रूप में कार्य कर सकते हैं। इन परिणामों से पार्टियों को अपनी कमजोरियों और ताकतों का पता चलेगा।
इन सभी सीटों पर वोटों की गिनती और परिणाम आने के बाद ही राजनीतिक विश्लेषक इन उपचुनावों के वास्तविक प्रभाव का आकलन कर पाएंगे। तब तक, सभी की निगाहें आज (19 जून, 2025) इन पांच विधानसभा सीटों पर टिकी हुई हैं।
