by-Ravindra Sikarwar
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार सुर्खियों में बने रहते हैं, चाहे वह इजरायल-ईरान संघर्ष पर उनकी टिप्पणियां हों, भारत-पाकिस्तान युद्धविराम में उनकी कथित भूमिका हो, या फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष की उनकी आलोचना हो। उनके बयान और गतिविधियां वैश्विक मंच पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं।
इजरायल-ईरान संघर्ष पर टिप्पणियां:
इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनावपूर्ण संघर्ष पर डोनाल्ड ट्रंप लगातार मुखर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में ईरान पर एक संभावित अमेरिकी हमले की संभावना के संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक तनाव और बढ़ गया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान ने उनसे बातचीत के लिए संपर्क किया था, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल और ईरान के बीच मिसाइल हमलों में तेजी आई है और अमेरिकी अधिकारियों द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी की खबरें हैं।
ट्रंप ने ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” करने का आह्वान किया है और ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई को भी सीधे तौर पर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि वे जानते हैं कि खामेनेई कहाँ छिपे हैं और उन्हें “निकाल” (मार) सकते हैं, लेकिन “फिलहाल” नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि “अगला सप्ताह बहुत बड़ा होने वाला है, शायद एक सप्ताह से भी कम।” इन बयानों से पता चलता है कि ट्रंप इस संघर्ष में अमेरिका की मजबूत भूमिका चाहते हैं और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख अपना रहे हैं।
हाल ही में, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इजरायल-ईरान मुद्दे में मध्यस्थता करने की पेशकश की थी। इस पर ट्रंप ने पुतिन को जवाब दिया कि पहले वे अपने घरेलू मसलों को सुलझाएं, उसके बाद मध्य पूर्व की चिंता करें। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर वे राष्ट्रपति होते तो रूस-यूक्रेन युद्ध कभी नहीं होता।
भारत-पाकिस्तान युद्धविराम में भूमिका पर दावा:
डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोका था। उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साथ व्हाइट हाउस में दोपहर के भोजन पर मुलाकात की, जहाँ उन्होंने फिर से इस दावे को दोहराया। ट्रंप ने कहा, “मैंने युद्ध रुकवाया है, मैं पाकिस्तान को पसंद करता हूं। मुझे लगता है मोदी एक शानदार इंसान हैं। मैंने कल रात उनसे बात की। हम भारत के मोदी के साथ व्यापार समझौता करने जा रहे हैं, लेकिन मैंने पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध रुकवा दिया है।” उन्होंने मुनीर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों की प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच टकराव को रोकने में उनकी “बहुत प्रभावी भूमिका” थी।
हालांकि, भारत ने हमेशा इस दावे का खंडन किया है। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने स्पष्ट किया है कि प्रधान मंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को बताया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी सैन्य गतिविधि को रोकने का प्रबंधन द्विपक्षीय रूप से स्थापित सैन्य संचार चैनलों के माध्यम से किया गया था, और यह पाकिस्तान के अनुरोध पर शुरू किया गया था। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी द्विपक्षीय समस्याओं में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता है और न कभी करेगा।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने तो ट्रंप को भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में उनकी भूमिका के लिए नोबेल शांति पुरस्कार देने की भी मांग की है।
फेडरल रिजर्व चेयर की आलोचना:
डोनाल्ड ट्रंप फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल की मौद्रिक नीतियों, विशेषकर ब्याज दरों को लेकर लगातार आलोचना करते रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि उच्च ब्याज दरें अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक हैं और उन्होंने पॉवेल को दरों में कटौती करने के लिए बार-बार दबाव डाला है।
हाल ही में फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले, ट्रंप ने पॉवेल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें फेडरल फंड्स रेट कम करने के लिए “किताब के हर नाम से पुकारा है”। उन्होंने पॉवेल को “नम्बस्कल” और “टू लेट” जैसे उपनामों से भी संबोधित किया है। ट्रंप ने कहा, “हमारे पास एक आदमी है जो फेड की दर कम करने से इनकार करता है—बस इनकार करता है। वह स्मार्ट व्यक्ति नहीं है। मुझे तो यह भी नहीं लगता कि वह इतना राजनीतिक है। मुझे लगता है कि वह मुझसे नफरत करता है, लेकिन यह ठीक है।”
ट्रंप ने यहां तक कहा है कि उनके पास पॉवेल को पद से हटाने की शक्ति है, हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करना मुश्किल होगा। ट्रंप की यह आलोचना ऐसे समय में आ रही है जब वैश्विक बाजार अस्थिर हैं और मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है। फेडरल रिजर्व ने अपनी नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखने का प्रयास किया है, लेकिन उसे वर्तमान प्रशासन से तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
कुल मिलाकर, डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों और गतिविधियों के माध्यम से वैश्विक भू-राजनीति और अर्थव्यवस्था में अपनी छाप छोड़ना जारी रखे हुए हैं। चाहे वह अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर उनके मजबूत विचार हों, उनकी मध्यस्थता के दावे हों, या प्रमुख आर्थिक संस्थानों की उनकी आलोचना हो, ट्रंप हमेशा चर्चा का केंद्र बने रहते हैं।
