by-Ravindra Sikarwar
इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष एक गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। हाल के दिनों में मिसाइल हमलों में तेजी आई है, और अमेरिकी अधिकारियों द्वारा ईरान पर संभावित हमले की तैयारी की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है। इस टकराव के तेहरान में सत्ता परिवर्तन की संभावना और वैश्विक तेल कीमतों पर इसके व्यापक प्रभाव को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हो रही है।
हालिया घटनाक्रम और मिसाइल हमले:
पिछले कुछ हफ्तों से दोनों देशों के बीच सीधे मिसाइल हमले और जवाबी कार्रवाई देखने को मिल रही है। इजरायल ने ईरान के हवाई रक्षा प्रणालियों और बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाया है, जबकि ईरान ने भी इजरायली शहरों, जैसे तेल अवीव और हाइफा पर मिसाइलें दागी हैं। इन हमलों में दोनों पक्षों को नुकसान हुआ है, ईरान में सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें हैं, जिनमें नागरिक भी शामिल हैं, जबकि इजरायल में भी जानें गई हैं।
इजरायल ने अपनी F-35 विमानों का उपयोग कर ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। इन हमलों को “ऑपरेशन राइजिंग लायन” नाम दिया गया है, जिसमें 200 से अधिक लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया। इजरायल का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना है। वहीं, ईरान ने इजरायल पर हमलों के जवाब में 150 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों और 100 से अधिक ड्रोन का इस्तेमाल किया है।
ईरान ने अपनी “सेजिल” मिसाइलों का भी पहली बार इस्तेमाल किया है, जिनकी मारक क्षमता 2000-2500 किलोमीटर तक है। इसके जवाब में इजरायल ने ईरान के यूरेनियम संवर्धन संयंत्रों और मिसाइल लॉन्च पैड पर भी हमला किया है।
अमेरिका की संभावित भूमिका और सत्ता परिवर्तन की अटकलें:
अमेरिकी अधिकारियों द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी की खबरें इस संघर्ष में एक नया आयाम जोड़ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मध्य पूर्व की स्थिति पर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ बैठकें की हैं और ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” का आह्वान किया है। यदि अमेरिका इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होता है, तो यह मध्य पूर्व में एक बड़े, पूर्ण युद्ध का कारण बन सकता है।
ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावना पर भी काफी चर्चा हो रही है। यदि इजरायल और अमेरिका के दबाव के चलते ईरानी शासन कमजोर पड़ता है या कोई अंदरूनी बदलाव होता है, तो इसके भू-राजनीतिक परिणाम दूरगामी हो सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने अपने करीबी सैन्य अधिकारियों की हत्याओं के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को नई शक्तियां सौंप दी हैं और वे खुद भी सुरक्षा कारणों से बंकर में छिपे हुए हैं। तेहरान में नागरिकों में भारी डर और असुरक्षा का माहौल है, और कई लोग देश छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
वैश्विक तेल कीमतों पर प्रभाव:
इजरायल-ईरान संघर्ष का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष वैश्विक प्रभाव तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। मध्य पूर्व विश्व के कच्चे तेल का एक बड़ा आपूर्तिकर्ता है, और किसी भी तरह की अस्थिरता से तेल की आपूर्ति बाधित होती है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं।
- हॉर्मुज जलसंधि का महत्व: हॉर्मुज जलसंधि, जो ईरान के पास स्थित है, विश्व के लगभग 20% कच्चे तेल और 25% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के व्यापार का मार्ग है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो तेल की आपूर्ति में भारी रुकावट आ सकती है, जिससे वैश्विक बाजार में हाहाकार मच सकता है।
- कीमतों में उछाल: संघर्ष शुरू होने के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में $8 से $10 प्रति बैरल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, और यह $75-$80 प्रति बैरल के आसपास स्थिर होने की संभावना है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।
- भारत पर असर: भारत अपनी 85% से अधिक तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आता है। तेल की कीमतें बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे रुपये पर दबाव पड़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में ₹3 से ₹5 प्रति लीटर की वृद्धि संभव है, जिससे परिवहन, खाद्य पदार्थ और विनिर्माण की लागत बढ़ेगी। हालांकि, सरकार और तेल कंपनियां मिलकर मूल्य वृद्धि को समायोजित करने की कोशिश कर सकती हैं।
- चीन पर असर: चीन ईरान के तेल का एक बड़ा खरीदार है और मध्य पूर्व में उसके महत्वपूर्ण हित हैं। यदि ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है और नई सरकार डॉलर में व्यापार करती है, तो चीन को सालाना 20 से 30 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
संक्षेप में, इजरायल-ईरान संघर्ष एक जटिल और बहुआयामी संकट है जिसके भू-राजनीतिक, आर्थिक और मानवीय परिणाम दूरगामी हो सकते हैं। इस संघर्ष का भविष्य अमेरिका की भूमिका, ईरान के भीतर के घटनाक्रम और वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
