by-Ravindra Sikarwar
लॉस एंजिल्स (कैलिफोर्निया, अमेरिका) में इन दिनों तनाव चरम पर है। अवैध प्रवासियों के खिलाफ ट्रंप प्रशासन की हालिया सख्त कार्रवाइयों के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं, जिसके परिणामस्वरूप शहर की सड़कों पर मरीन और नेशनल गार्ड सैनिकों की तैनाती करनी पड़ी है। इसके साथ ही, अमेरिकी राजनीति में भी डोनाल्ड ट्रंप और एलोन मस्क जैसे प्रमुख हस्तियों के बीच तीखी जुबानी जंग चल रही है, जो सुर्खियां बटोर रही है।
लॉस एंजिल्स में बिगड़ते हालात और सैन्य तैनाती:
लॉस एंजिल्स में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन जारी हैं। इन प्रदर्शनों की शुरुआत शुक्रवार, 6 जून 2025 को आप्रवासन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) द्वारा की गई बड़े पैमाने की छापेमारी के बाद हुई, जिसमें कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने इन कार्रवाइयों को अमानवीय और असंवैधानिक बताया है। शुरुआती शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बाद, स्थिति बिगड़ने लगी और रविवार को कई जगह वाहनों में आगजनी, तोड़फोड़ और अधिकारियों के साथ झड़पें हुईं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम की इच्छा के विरुद्ध नेशनल गार्ड सैनिकों को लॉस एंजिल्स में तैनात करने का आदेश दिया। लगभग 2,000 नेशनल गार्ड सैनिकों की तैनाती के बावजूद, सोमवार को भी प्रदर्शन जारी रहे। इसके बाद, ट्रंप प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगभग 700 मरीन सैनिकों को भी शहर में भेजने का फैसला किया। यह पहली बार है जब ट्रंप प्रशासन ने देश के भीतर सक्रिय ड्यूटी मरीन को तैनात करने का निर्णय लिया है, जिन्हें आमतौर पर युद्ध क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
कैलिफोर्निया के नेताओं ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने घोषणा की है कि राज्य ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है, जिसमें मरीन सैनिकों की तैनाती को “सत्ता का दुरुपयोग” और “राज्य की संप्रभुता को कमजोर करने वाला” बताया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा कैलिफोर्निया नेशनल गार्ड को गैरकानूनी रूप से सक्रिय करने को हल्के में नहीं लिया जाएगा। शहर के मेयर और गवर्नर के बीच व्हाइट हाउस के इस फैसले को लेकर भी तीखी नोकझोंक जारी है।
अमेरिकी राजनीति में ट्रंप और मस्क के बीच तकरार:
लॉस एंजिल्स की अशांति के बीच, अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में भी एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम चल रहा है – डोनाल्ड ट्रंप और टेस्ला व स्पेसएक्स के सीईओ एलोन मस्क के बीच बढ़ता विवाद। कभी एक-दूसरे के करीबी सहयोगी माने जाने वाले ट्रंप और मस्क के संबंध अब खुलकर बिगड़ गए हैं।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब मस्क ने ट्रंप के प्रस्तावित “$2.4 ट्रिलियन के भव्य बिल” की कड़ी आलोचना की, जिसे उन्होंने “घिनौना और अपमानजनक” बताया। इसके जवाब में, ट्रंप ने मस्क के व्यवसायों को मिलने वाले सरकारी अनुबंधों को रद्द करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि “एलोन की सरकारी सब्सिडी और अनुबंधों को समाप्त करना” अरबों डॉलर बचाने का सबसे आसान तरीका होगा।
मस्क ने भी पलटवार करते हुए ट्रंप पर “अकृतज्ञता” का आरोप लगाया और बिना किसी सबूत के यह दावा किया कि ट्रंप का नाम कुख्यात फाइनेंसर और यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में शामिल है। मस्क ने सोशल मीडिया पर यह भी कहा कि “अगर मैंने ट्रंप की मदद नहीं की होती, तो शायद ट्रंप चुनाव ही न जीत पाते।” हालांकि, मस्क ने बाद में एपस्टीन से संबंधित अपने पोस्ट हटा दिए।
इस बीच, एलोन मस्क ने एक नई राजनीतिक पार्टी शुरू करने का विचार भी रखा है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोल चलाया, जिसमें पूछा गया कि “क्या अमेरिका में एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का समय आ गया है जो वास्तव में बीच के 80% लोगों का प्रतिनिधित्व करे?” जब 80% से अधिक लोगों ने हां में जवाब दिया, तो मस्क ने “द अमेरिका पार्टी” नामक एक नई पार्टी का प्रस्ताव रखा। यह कदम अमेरिका की पारंपरिक दो-दलीय राजनीति को चुनौती देने का संकेत देता है और रिपब्लिकन पार्टी के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि मस्क 2024 के चुनाव चक्र में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के प्रमुख वित्तीय समर्थकों में से एक थे।
यह राजनीतिक तकरार दिखाती है कि कैसे व्यापारिक दिग्गजों और राजनेताओं के बीच संबंध तेज़ी से बदल सकते हैं, और कैसे व्यक्तिगत विवाद भी व्यापक राजनीतिक और आर्थिक परिणामों को जन्म दे सकते हैं।
