
कराची, पाकिस्तान: पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पानी की भारी किल्लत और विवादित नहर परियोजनाओं के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों ने बुधवार (21 मई 2025) को हिंसक रूप ले लिया। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि गुस्साई भीड़ ने सिंध के गृह मंत्री के घर को आग के हवाले कर दिया और कई वाहनों को भी आग लगा दी। इस भीषण बवाल में एक डीएसपी सहित कम से कम छह पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं, जबकि दर्जनों अन्य लोगों के भी घायल होने की खबर है।
हिंसा की जड़: पानी का बंटवारा और ‘चोलिस्तान नहर परियोजना’
सिंध प्रांत में जल संकट गहरा गया है, जिससे किसानों और आम जनता में भारी आक्रोश है। विवाद का मुख्य कारण केंद्र सरकार और सेना द्वारा सिंधु नदी पर 176 किलोमीटर लंबी छह नहरें बनाने की योजना है, जिसके तहत सिंधु नदी का पानी पंजाब के चोलिस्तान रेगिस्तान में ले जाया जाना है। सिंध के लोगों का आरोप है कि यह परियोजना उनके हिस्से के पानी को पंजाब ले जाने की एक साजिश है, जिससे उन्हें पहले से ही कम मिल रहे पानी से और भी वंचित होना पड़ेगा।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे पहले से ही पानी की भारी कमी का सामना कर रहे हैं और यह नई नहर परियोजना उनके लिए और भी मुश्किलें खड़ी कर देगी। सिंध को पहले से ही अपने हिस्से के पानी से लगभग 20% कम पानी मिल रहा है, और प्रांतों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर हमेशा से भेदभाव होता रहा है, जिसमें पंजाब को सबसे बड़ा हिस्सा मिलता है।
गृह मंत्री के आवास पर हमला
हिंसक प्रदर्शनों का केंद्र सिंध प्रांत के गृह मंत्री जियाउल हसन लंजर का गृह जिला, नौशहरो फिरोज का मोरो शहर रहा। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, गुस्साई भीड़ ने मंत्री के आवास पर धावा बोल दिया, कमरों और फर्नीचर को आग लगा दी। जब गृह मंत्री के निजी गार्ड मौके पर पहुंचे, तो प्रदर्शनकारियों ने उन्हें भी निशाना बनाने की कोशिश की, जिसके बाद गार्डों को हवाई फायरिंग करनी पड़ी। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे पर खड़े दो ट्रेलरों को भी आग के हवाले कर दिया और लूटपाट की घटनाओं को भी अंजाम दिया।
पुलिस से झड़प और हताहत
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई घातक झड़पों में एक डीएसपी सहित छह पुलिसकर्मी घायल हो गए। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसके बाद स्थिति और बिगड़ गई। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि झड़पों में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
आगे क्या?
सिंध में जारी यह हिंसा पाकिस्तान की आंतरिक जल-नीति और प्रांतों के बीच भेदभावपूर्ण रवैये पर गंभीर सवाल उठाती है। सरकार पर इस गंभीर स्थिति को नियंत्रित करने और पानी के न्यायसंगत बंटवारे को सुनिश्चित करने का भारी दबाव है। यदि इस मुद्दे का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो सिंध में अस्थिरता और बढ़ सकती है, जिसका पाकिस्तान की समग्र स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
