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नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक भव्य समारोह में प्रख्यात संस्कृत विद्वान, आध्यात्मिक गुरु और तुलसी पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज को प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में साहित्य और कला जगत की कई महत्वपूर्ण हस्तियां उपस्थित थीं। इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए असाधारण योगदान की सराहना की।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि शारीरिक सीमाओं के बावजूद स्वामी रामभद्राचार्य ने साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में जो अद्भुत कार्य किया है, वह अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक महान स्रोत है। राष्ट्रपति ने स्वामी जी की विद्वता, उनकी रचनाओं की गहराई और समाज के प्रति उनके समर्पण की प्रशंसा की।

इस विशेष उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा, “आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा पूज्य संत, जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज को संस्कृत भाषा व साहित्य के क्षेत्र में उनके अतुल्य योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित होने पर हृदयतल से बधाई! आपका कालजयी रचना संसार वैश्विक साहित्य जगत के लिए अमूल्य धरोहर है।” मुख्यमंत्री ने स्वामी जी के साहित्यिक योगदान को विश्व साहित्य के लिए एक अनमोल विरासत बताया।

गौरतलब है कि ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है। वर्ष 2023 के लिए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के प्राप्तकर्ताओं की घोषणा दो वर्ष पहले की गई थी, जिसमें जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के साथ-साथ प्रसिद्ध उर्दू कवि और बॉलीवुड हस्ती गुलज़ार साहब का भी नाम शामिल था। यह भारतीय साहित्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अवसर है, जहाँ दो अलग-अलग भाषाओं के दिग्गजों को एक साथ यह सम्मान प्रदान किया गया।

जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य संस्कृत विद्वता और हिंदू आध्यात्मिकता की दुनिया में एक अत्यंत सम्मानित व्यक्ति हैं। मध्य प्रदेश में स्थित तुलसी पीठ के संस्थापक और प्रमुख के रूप में, शिक्षा, साहित्य और आध्यात्मिक प्रवचनों के क्षेत्र में उनका योगदान अद्वितीय और व्यापक है। उन्होंने चार महाकाव्यों सहित 240 से अधिक पुस्तकें और ग्रंथों की रचना की हैं, जो विभिन्न विषयों और साहित्यिक रूपों में फैली हुई हैं। उनकी विद्वता और रचनात्मकता को 2015 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है, जो भारतीय संस्कृति और विद्वता पर उनके महत्वपूर्ण प्रभाव का प्रमाण है।

स्वामी रामभद्राचार्य एक बहुभाषी विद्वान हैं और उन्हें 22 भाषाओं का ज्ञान है। भाषाओं की सीमाओं से परे उनका प्रभाव भारतीय आध्यात्मिक और साहित्यिक परंपराओं की सार्वभौमिकता का प्रतीक है। उनकी रचनाएं और प्रवचन न केवल संस्कृत साहित्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और दर्शन को भी समृद्ध करते हैं। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होना उनके असाधारण योगदान की एक और महत्वपूर्ण पहचान है, जो उन्हें देश के महानतम साहित्यिक हस्तियों की श्रेणी में स्थापित करता है। इस अवसर पर स्वामी जी के उत्तराधिकारी जय महाराज भी उपस्थित रहे।

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