Spread the love

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को लेकर एक बार फिर अपनी राय व्यक्त की है, जिससे राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। उन्होंने सिंधु जल समझौते और जम्मू-कश्मीर के विकास परियोजनाओं पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए दोनों देशों के बीच शांति और सौहार्दपूर्ण संबंधों की वकालत की है।

महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ‘सीमा पार के लोगों को खुश करने की कोशिश’ वाली टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युद्ध के कारण सिंधु जल समझौते पर रोक लगी थी, लेकिन अब जब हालात सामान्य हो रहे हैं, तो तूलबुल ब्रिज जैसी परियोजनाओं पर बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि “जंग की वजह से सिंधु जल समझौते पर रोक लगी है, लेकिन अब जंग नहीं है और हालात सामान्य हो रहे हैं, कई निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई है। ऐसे में उमर साहब का ये कहना कि तूलबुल ब्रिज को बनाएंगे, मुझे लगता है ये एक उकसावा भरा बयान है।”

उन्होंने दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “मैं चाहती हूँ कि किसी तरह दोनों देशों के बीच अमन और आराम हो जाये। सुकून हो जाये और ऐसे में हमें वो बात करनी चाहिए जिससे अमन बढ़े।” महबूबा मुफ्ती ने यह भी कहा कि “अभी वो बात नहीं कहनी चाहिए जिससे उकसावा बढ़े और जंग जैसे हालात फिर से दुबारा हो जाए। उमर साहब बोलते हैं कि हम पवार प्रोजेक्ट बनाएंगे लेकिन हमारे पास 7 पॉवर प्रोजेक्ट पहले से हैं। जब वह सरकार में थीं तो कश्मीर को सारे तोहफे में दे चुकी हैं।”

महबूबा मुफ्ती ने भारत सरकार और उमर अब्दुल्ला को सलाह देते हुए कहा, “हमारे पास पहले से इतनी बिजली और पानी है जिसे हम इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं और कश्मीर का बिजली पानी पूरे मुल्क के काम आ रहा है लेकिन हमारे काम नहीं आ रहा है।” उन्होंने कहा कि “मुझे लगता है यजीद नहीं बनाना चाहिए क्योंकि यजीद ने पानी बंद किया था और बहुत बच्चे मारे गए थे। आज भारत सरकार और उमर अब्दुल्ला की सरकार फिर से वही दोहराना चाहती है। फारुख साहब बार बार दोहराते हैं कि बालाकोट से भी बड़ा एक्‍शन होना चाहिए, तो अब तो हो गया और उसमें बच्चे भी मर गए महिलाएं भी मर गए। अब और क्या चाहिए उन्हें।”

महबूबा मुफ्ती ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का हवाला देते हुए कहा कि “हालात इतने बुरे हो गए कि यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति को भी भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। महबूबा मुफ्ती का कहना है कि हमें ऐसी बातें कहने से बचना चाहिए जो दूसरों को भड़काएं और पाकिस्तान के रोके गए पानी उन्हें दे देना चाहिए।”

महबूबा मुफ्ती के इन बयानों ने राजनीतिक गलियारों में विवाद पैदा कर दिया है। कुछ लोग उनकी शांति की अपील का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य उनकी टिप्पणियों को भारत की सुरक्षा नीतियों के खिलाफ मानते हैं। उनके राजनीतिक विरोधियों ने उनपर पाकिस्तान का पक्ष लेने का आरोप लगाया है।

महबूबा मुफ्ती अतीत में भी अपने विवादास्पद बयानों के लिए जानी जाती रही हैं, और उनके नवीनतम बयान ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों और जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर बहस को तेज कर दिया है। यह देखना बाकी है कि इन बयानों का राजनीतिक प्रभाव क्या होगा।