
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति द्वारा पद और गोपनीयता की शपथ ली। जस्टिस गवई देश के पहले बौद्ध मुख्य न्यायाधीश और आजादी के बाद दलित समुदाय से दूसरे मुख्य न्यायाधीश हैं। 1 उनका कार्यकाल 23 नवंबर 2025 को समाप्त होगा।
जस्टिस गवई की उल्लेखनीय यात्रा:
- ऐतिहासिक उपलब्धि: जस्टिस बी.आर. गवई भारत के पहले बौद्ध मुख्य न्यायाधीश बने हैं, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
- दलित समुदाय से दूसरा CJI: आजादी के बाद वे दलित समुदाय से दूसरे मुख्य न्यायाधीश हैं। इससे पहले, जस्टिस के.जी. बालाकृष्णन 2007 में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने थे।
- डॉ. अंबेडकर का प्रभाव: जस्टिस गवई के पिता रामकृष्ण सूर्यभान गवई ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था, जिसका उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है।
- झुग्गी से सुप्रीम कोर्ट तक: जस्टिस गवई ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि डॉ. अंबेडकर के प्रयासों के कारण ही वे अमरावती की एक झुग्गी बस्ती के नगरपालिका स्कूल से पढ़कर इस उच्च पद तक पहुंचे हैं।
- राजनीतिक मामलों में महत्वपूर्ण फैसले: सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान, जस्टिस गवई ने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक मामलों में फैसले सुनाए हैं, जिनमें न्यूजक्लिक के संस्थापक संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से जुड़े मामले शामिल हैं।
- कानून के शासन की वकालत: उन्होंने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और धन शोधन निवारण अधिनियम जैसे कानूनों में मनमानी गिरफ्तारी के खिलाफ फैसले दिए हैं।
- बुलडोजर कार्रवाई पर रोक: जस्टिस गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने नवंबर 2024 में यह फैसला दिया कि उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना लोगों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाना कानून के शासन के खिलाफ है।
- आरक्षण पर महत्वपूर्ण राय: वे अनुसूचित जातियों के आरक्षण में आरक्षण देने की वकालत करने वाली सात जजों की संविधान पीठ में भी शामिल थे।
- राहुल गांधी मामले में राहत: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आपराधिक मानहानि के मामले में सजा को स्थगित करने वाली पीठ में भी जस्टिस गवई शामिल थे, जिससे राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल हुई थी।
पारिवारिक पृष्ठभूमि:
- महाराष्ट्र के दिग्गज नेता पिता: जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। उनके पिता रामकृष्ण सूर्यभान गवई महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध नेता थे, जिन्होंने महाराष्ट्र विधान परिषद और लोकसभा में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (गवई) की स्थापना भी की थी।
- मां का योगदान: जस्टिस गवई का पालन-पोषण उनकी मां कमलाताई की देखरेख में हुआ, क्योंकि उनके पिता राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहते थे।
- सादा जीवन: उन्होंने अपना बचपन अमरावती की झुग्गी बस्ती फ्रेजरपुरा में बिताया और वहीं के नगरपालिका स्कूल में पढ़ाई की।
शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा:
- शिक्षा: जस्टिस गवई ने अमरावती विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की।
- वकालत: 25 साल की उम्र में उन्होंने वकालत शुरू की और मुंबई और अमरावती की अदालतों में काम किया।
- सरकारी वकील: उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में सरकारी वकील के रूप में भी काम किया।
- न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति: उन्हें 2003 में बॉम्बे हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश और 2005 में स्थायी न्यायाधीश बनाया गया।
- सुप्रीम कोर्ट में योगदान: सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं, जो कानून के शासन और मानवाधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण रहे हैं।
- राहुल गांधी के मामले में निष्पक्षता: राहुल गांधी के मामले की सुनवाई के दौरान, जस्टिस गवई ने अपने परिवार के राजनीतिक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए सुनवाई से हटने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन दोनों पक्षों ने उन पर विश्वास जताया।
जस्टिस बी.आर. गवई का जीवन और करियर न्यायपालिका में निष्पक्षता, समर्पण और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
