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Muslim Rights India:हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले में आयोजित जमीयत उलमा-ए-हिंद की मजलिस-ए-मुन्तजिमा के अधिवेशन का दूसरा दिन काफी चर्चाओं में रहा। इस अधिवेशन को संबोधित करते हुए जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने देश के मौजूदा हालात, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और राजनीतिक माहौल पर बेहद बेबाक अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने दो टूक कहा कि भारतीय मुसलमान इस देश के महज किरायेदार नहीं बल्कि बराबर के हिस्सेदार हैं और देश की आजादी में उनके पुरखों का अहम योगदान रहा है।

“संविधान और इंसाफ के निजाम को कमजोर करने की हो रही कोशिश”

Muslim Rights India:अपने संबोधन की शुरुआत में मौलाना महमूद मदनी ने देश के वर्तमान परिदृश्य पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज देश एक ऐसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है जहां लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की मूल भावना को बदलने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मदनी ने आरोप लगाया कि देश में नफरत का माहौल इस हद तक पैदा कर दिया गया है कि न सिर्फ अल्पसंख्यकों, दलितों और पिछड़ों के संवैधानिक अधिकार खतरे में हैं, बल्कि कानून का राज और न्याय व्यवस्था भी तार-तार होती नजर आ रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 1947 के दौर में द्वि-राष्ट्र सिद्धांत (टू नेशन थ्योरी) को ठुकराकर उनके बुजुर्गों ने इस मिट्टी को अपने खून से सींचा था।

“क्या इस देश में मुसलमान होना जुर्म बन गया है?”

Muslim Rights India:मौलाना मदनी ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि आज देश में मुसलमानों के लिए हालात लगातार तंग किए जा रहे हैं और उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक साबित करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम इस मुल्क के किरायेदार नहीं बल्कि हिस्सेदार हैं। हम किसी राजनीतिक पार्टी के एहसान से यहां नहीं हैं, बल्कि हमारे बुजुर्गों ने इस देश के लिए कुर्बानियां दी हैं।”

उन्होंने भीड़ से मुखातिब होते हुए सवाल किया कि क्या आज के भारत में मुसलमान होना कोई जुर्म हो गया है? उन्होंने चेताया कि जो लोग अल्पसंख्यकों को उनका हक देने से कतराते हैं, वे असल में इस देश के संविधान और लोकतंत्र के सबसे बड़े गद्दार हैं।

“बुलडोजर न्याय प्रणाली रूल ऑफ लॉ के सीने पर प्रहार है”

Muslim Rights India:देश में हाल के वर्षों में बढ़ी बुलडोजर कार्रवाई पर कड़ा प्रहार करते हुए मदनी ने इसे ‘सो-कॉल्ड बुलडोजर जस्टिस’ करार दिया। उन्होंने कहा कि बुलडोजर किसी ईंट-गारे के मकान पर नहीं बल्कि देश के कानून के शासन (Rule of Law) और अदालतों की गरिमा के सीने पर चल रहा है।

उन्होंने कहा कि कार्यपालिका (Executive) और न्यायपालिका की शक्तियों को दरकिनार कर कुछ लोग खुद ही जज और जल्लाद की भूमिका में आ गए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बहुसंख्यक समाज के मन में यह झूठा डर बैठाया जा रहा है कि वे खतरे में हैं, जबकि हकीकत में यह सब राजनीतिक लाभ और वोटों की खातिर किया जा रहा है।

घुसपैठ और आबादी के मुद्दे पर सरकार को घेरा

Muslim Rights India:देश के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सुनियोजित प्रोपगंडा चलाने का आरोप लगाते हुए जमीयत प्रमुख ने कहा कि जब सरकारें युवाओं को रोजगार देने और अर्थव्यवस्था संभालने में नाकाम होती हैं, तब ‘घुसपैठिए’ और ‘आबादी जिहाद’ जैसे मुद्दे उछाले जाते हैं।

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मुसलमानों की बर्थ रेट में गिरावट आई है और यह घटकर 2.36 पर आ गई है जो राष्ट्रीय औसत के बेहद करीब है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि देश में कोई अवैध रूप से आता है, तो उसे रोकना सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है। अगर वे रोकने में असफल हैं, तो उसका ठीकरा अल्पसंख्यकों के सिर पर फोड़ा जाना गलत है।

मुस्लिम समाज और नेतृत्व को दी आत्ममंथन की सलाह

Muslim Rights India:अपने संबोधन के आखिरी हिस्से में मौलाना मदनी ने मुस्लिम समाज और धार्मिक नेतृत्व को भी आईना दिखाया। उन्होंने कौम के युवाओं, महिलाओं और बच्चों के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि समाज का अपने धार्मिक और बौद्धिक जड़ों से संपर्क कमजोर हुआ है।

उन्होंने उलेमाओं और इमामों को सलाह दी कि वे पारंपरिक और जटिल उर्दू भाषा के बजाय स्थानीय और आम बोलचाल की भाषा (जैसे हिंदी, कन्नड़, मराठी या तेलुगू) में बात करें ताकि आज की युवा पीढ़ी उनकी बात को गहराई से समझ सके।

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