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रिपोर्टर: रंजीत सिंह

Bhopal : मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में जल्द ही बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में अदला-बदली करने जा रही है। लंबे सफर और गृह जिलों से प्रभार वाले जिलों की अत्यधिक दूरी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, दिसंबर के पहले पखवाड़े तक नई व्यवस्था लागू की जा सकती है, जबकि बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार पर निर्णय नए साल में ही लिया जाएगा।

लंबी दूरी और नियमित दौरों की कमी बनी वजह

Bhopal कई मंत्रियों के प्रभार वाले जिले उनके गृह जिलों से सैकड़ों किलोमीटर दूर हैं। उदाहरण के तौर पर, कैलाश विजयवर्गीय का गृह जिला इंदौर है जबकि उनके पास लगभग 650 किलोमीटर दूर स्थित सतना जिले का प्रभार है। इसी तरह संपतिया उइके के पास मंडला से 761 किलोमीटर दूर स्थित आलीराजपुर का प्रभार है। दूरी अधिक होने के कारण कई मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में नियमित दौरे नहीं कर पा रहे थे, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय संगठन में असंतोष की स्थिति बन रही थी।

केंद्रीय संगठन से मिली केवल एक प्रस्ताव को मंजूरी

Bhopal मध्य प्रदेश सरकार ने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को तीन प्रमुख प्रस्ताव भेजे थे, जिनमें मंत्रिमंडल विस्तार, मंत्रियों के विभागों में बदलाव और प्रभार वाले जिलों में फेरबदल शामिल थे। हालांकि, केंद्रीय संगठन से फिलहाल केवल प्रभार वाले जिलों को बदलने के प्रस्ताव को ही स्वीकृति मिली है। विभागों में बदलाव और नए मंत्रियों को शामिल करने संबंधी फैसलों को नए साल तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

दिसंबर में लागू हो सकती है नई व्यवस्था

Bhopal मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास मंत्रियों के पिछले एक साल के प्रदर्शन और दौरों की विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध है। इस रिपोर्ट और भौगोलिक दूरी के तालमेल को ध्यान में रखते हुए जिलों का नया आवंटन किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि दिसंबर के पहले 15 दिनों के भीतर मंत्रियों को उनके नए प्रभार वाले जिले सौंप दिए जाएंगे, ताकि वे प्रशासनिक कामकाज और पार्टी संगठन के कार्यों में अधिक समय दे सकें।

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