रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Raigarh : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां डिजिटल टोकन और क्रिप्टोकरेंसी में भारी-भरकम मुनाफे का झांसा देकर एक युवक से 11 लाख 60 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। आरोपियों के बहकावे में आकर पीड़ित ने अपनी पैतृक जमीन (खेत) तक बेच दी और पूरी रकम निवेश कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए रायगढ़ साइबर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
खेत बेचकर युवक ने किए थे 11.60 लाख रुपये निवेश
Raigarh पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मूल रूप से ओडिशा के गंजाम जिले के रहने वाले और वर्तमान में रायगढ़ के चक्रधरनगर क्षेत्र में निवासरत विक्रम परिडा (26) से यह ठगी की गई। वर्ष 2024 में उसकी मुलाकात गजुला मोहन नामक युवक से हुई थी, जो इलाके में ही एक फास्ट फूड की दुकान पर काम करता था। आरोपी ने विक्रम को ‘यूनिटी मेटा टोकन’ और ‘बीड क्वाइन’ में पैसे लगाकर रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाया। शातिर तस्कर के झांसे में आकर पीड़ित ने अपना खेत बेच दिया और जुलाई से सितंबर 2024 के बीच कुल 11.60 लाख रुपये अलग-अलग किस्तों में ट्रांसफर कर दिए।
न मिला मुनाफा और न ही वापस लौटी मूल रकम
Raigarh जब पीड़ित ने तय समय के बाद अपना मुनाफा और निवेश की गई मूल राशि वापस मांगी, तो आरोपियों ने पहले उसे टालना शुरू किया और बाद में साफ मुकर गए। जब पैसे मिलने की कोई उम्मीद नहीं बची, तो पीड़ित ने रायगढ़ साइबर थाने में पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत केस दर्ज कर तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों के लेन-देन की बारीकी से जांच शुरू की, जिससे इस अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ।
पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोचा, ओडिशा-मुंबई तक जुड़े तार
Raigarh साइबर सेल की जांच में सामने आया कि ठगी की इस रकम को ठिकाने लगाने के लिए चंदन दास और भावेष पटेल के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने इस नेटवर्क की गहराई से पड़ताल करते हुए मुख्य आरोपी गजुला मोहन, चंदन दास और भावेष पटेल को धर दबोचा। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी गजुला मोहन के खिलाफ पहले से ही धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के ओडिशा और मुंबई तक फैले संपर्कों की तलाश कर रही है।

