DurgDurg
Spread the love

रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह

Durg : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के बोरई-रसमड़ा औद्योगिक क्षेत्र स्थित जेडी स्टील प्लांट में एक भीषण हादसा सामने आया है। प्लांट में इंडक्शन फर्नेस (भट्टी) के ट्रायल के दौरान अचानक पिघला हुआ गर्म मेटल बाहर छलक आया, जिसकी चपेट में आने से 42 वर्षीय कर्मचारी संतोष कुमार श्रीवास्तव गंभीर रूप से झुलस गए। इलाज के दौरान अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर प्लांट के निदेशक और ठेकेदार के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।

फर्नेस ट्रायल के दौरान हुआ हादसा, 1500 डिग्री गर्म लोहे की चपेट में आए कर्मी

Durg प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा 17 अक्टूबर की रात करीब एक बजे हुआ, जब जेडी स्टील इंडस्ट्रीज में इंडक्शन फर्नेस का ट्रायल किया जा रहा था। संतोष कुमार श्रीवास्तव मशीन की जांच के सिलसिले में ऊपर गए हुए थे। इसी दौरान अचानक भट्टी से भारी मात्रा में खौलता हुआ पिघला मेटल बाहर निकल आया। लोहे का तापमान लगभग 1500 से 1600 डिग्री सेल्सियस के आसपास था, जिससे संतोष बुरी तरह झुलस गए। मूल रूप से बिहार के चंपारण के रहने वाले संतोष को कुछ ही दिन पहले प्लांट में ठेके पर काम मिला था।

सेक्टर-9 अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम

Durg हादसे के तुरंत बाद घायल संतोष को गंभीर हालत में भिलाई के सेक्टर-9 अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश की। हालांकि, शरीर बुरी तरह जल जाने के कारण उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका और उसी दिन दोपहर करीब 3:30 बजे उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

पुलिस ने प्लांट संचालक और ठेकेदार पर की कड़ी कार्रवाई

Durg दुर्ग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि अस्पताल से मिली सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में प्लांट प्रबंधन की लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाए जाने पर पुलिस ने प्लांट संचालक (निदेशक) और ठेकेदार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 289 और 106(1) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि ट्रायल के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे या नहीं।

ये भी पढ़े: दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी: “आप लोग GenZ नहीं हैं”, सौरव दास और आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका