रिपोर्टर: विपिन साहू
Regime Change Remark : ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime Change) को लेकर देश में जारी जुबानी जंग के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयानों पर जोरदार पलटवार किया है। रिजिजू द्वारा भारत की तुलना बांग्लादेश से किए जाने पर थरूर ने कहा कि भारत की परिस्थितियां पूरी तरह से अलग हैं और इसकी तुलना फ्रांस या बांग्लादेश जैसे देशों से करना अप्रासंगिक है। थरूर ने स्पष्ट किया कि विपक्ष केवल शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों में विश्वास रखता है, न कि हिंसा या तख्तापलट जैसी गतिविधियों में।
‘सत्ता परिवर्तन’ टिप्पणी पर शुरू हुआ विवाद और रिजिजू का तीखा हमला
Regime Change Remark यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब जेएनयू छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा और विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) का विरोध करते हुए ‘सत्ता परिवर्तन’ की बात कही। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर विपक्षी नेताओं का एक वीडियो शेयर करते हुए तंज कसा और लिखा कि ‘सत्ता परिवर्तन का सपना देखने वाले ध्यान से सुन लें कि भारत, बांग्लादेश नहीं है।’ उन्होंने कहा कि देश का युवा आज नवाचार, खेल और स्टार्टअप्स के जरिए राष्ट्र निर्माण में लगा है, न कि देश को नुकसान पहुंचाने में।
शशि थरूर का रुख: निष्पक्ष चुनाव की मांग, हिंसा से दूरी
Regime Change Remark रिजिजू के इस हमले पर जवाब देते हुए शशि थरूर ने कहा कि विपक्ष फ्रांस में हुई बसों और पुलिस स्टेशनों को जलाने जैसी हिंसक घटनाओं का कभी समर्थन नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘सत्ता परिवर्तन’ जैसे शब्दों को गलत तरीके से पेश करने के बजाय बुनियादी मुद्दों पर बात होनी चाहिए। थरूर ने कहा कि विपक्ष की मुख्य मांग सिर्फ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराना है। मतदाता सूची से लाखों लोगों के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने इसे संवैधानिक अधिकार से जुड़ा मुद्दा करार दिया।
SIR प्रक्रिया, CJP और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे का मुद्दा
Regime Change Remark दरअसल, दिल्ली में विपक्षी दल, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और वामपंथी संगठन मिलकर निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया का भारी विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम अनुचित तरीके से हटाए गए हैं। वे मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। CJP को कई विपक्षी दलों का समर्थन हासिल है, जो NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेर चुकी है।

