Chhattisgarh Furniture ScamChhattisgarh Furniture Scam
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रिपोर्टर: योगेन्‍द्र सिंह

Chhattisgarh Furniture Scam : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राजीव गांधी शिक्षा मिशन फर्नीचर घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW/ACB) ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। वर्ष 2010-11 के दौरान हुए इस बड़े वित्तीय घोटाले के मामले में जांच एजेंसी ने कुल 10 आरोपियों के खिलाफ लगभग 20 हजार पन्नों का विस्तृत चालान अंबिकापुर स्थित विशेष न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया है। प्रारंभिक और विस्तृत जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के कारण शासन को कुल 67 लाख 48 हजार रुपये की भारी-भरकम आर्थिक क्षति उठानी पड़ी थी।

क्या था पूरा मामला और कैसे हुआ नियमों का उल्लंघन?

Chhattisgarh Furniture Scam वित्तीय वर्ष 2010-11 में सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत अविभाजित सरगुजा जिले के मिडिल स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर क्रय करने हेतु शासन द्वारा 2 करोड़ 70 लाख रुपये का भारी बजट जारी किया गया था। जिला मिशन कार्यालय द्वारा छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (CSIDC) की निर्धारित दरों और नियमों के तहत 10 अलग-अलग फर्मों को कुल 2 करोड़ 68 लाख 18 हजार रुपये के सप्लाई ऑर्डर दिए गए थे। नियमों के मुताबिक, सामग्री मिलने के बाद उसका भौतिक सत्यापन होना अनिवार्य था और उसके बाद ही फर्मों को भुगतान के चेक जारी किए जाने थे। आरोप है कि तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक एसपी पाण्डेय ने कलेक्टर के स्पष्ट दिशा-निर्देशों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए अप्रैल 2011 के शुरुआती दिनों में ही बिना फर्नीचर की आपूर्ति हुए सभी फर्मों को चेक जारी कर दिए।

फर्जी बैंक खाता खुलवाकर राशि आहरण और कमीशनखोरी का खुलासा

Chhattisgarh Furniture Scam जांच के दौरान एक अन्य फर्म दर्शन फेब्रिकेशन के नाम पर हुई गंभीर गड़बड़ी का भी पर्दाफाश हुआ। आरोप है कि मुख्य आरोपी एसपी पाण्डेय ने रायपुर के संबंधित फर्म संचालक के नाम जारी आर्डर को दूसरे व्यक्ति को दे दिया और उसके नाम से बैंक में एक फर्जी खाता खुलवाकर बड़ी रकम का आहरण कर लिया गया। पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि इस पूरी प्रक्रिया में भारी कमीशन का खेल खेला गया था और कागजों में फर्नीचर सप्लाई दर्शा दी गई, जबकि हकीकत में किसी भी स्कूल में एक भी कुर्सी या टेबल नहीं पहुंचाई गई थी। इसके अलावा, अन्य फर्मों द्वारा भी या तो बिल्कुल आपूर्ति नहीं की गई या फिर बेहद कम मात्रा में घटिया सामग्री भेजी गई।

EOW की सख्त कार्रवाई और नामजद आरोपी

Chhattisgarh Furniture Scam EOW ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। चालान में सेवानिवृत्त जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय और संजय पटेल को मुख्य आरोपी बनाया गया है, जिन्हें पूर्व में गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा अन्य आठ फर्मों के संचालक, जिनमें अम्बिका अलमिरा के अजय अग्रवाल, सेलेनो स्टील की ममता अग्रवाल, महामाया फेब्रिकेटर्स के बिधी सिंह कटलारिया, सूर्या स्टील के राजकुमार बंसल, श्री साई इंडस्ट्रीज के संदीप तिवारी, श्याम मेटल के हितेश अग्रवाल, श्री श्याम इंडस्ट्रीज के रितेश अग्रवाल और पंकज फर्नीचर मार्ट के संजीव गुप्ता शामिल हैं, को आरोपी बनाया गया है। अब न्यायालय में इस मामले की विधिवत सुनवाई आगे बढ़ेगी।

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