By: Ravindra Singh
Maa Chandraghanta : शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का यह स्वरूप शक्ति, पराक्रम, साहस और शांति का प्रतीक है। मां चंद्रघंटा की उपासना करने से भक्तों को भय और नकारात्मकता का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। मान्यता है कि विधि-विधान से माता की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है। आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पौराणिक कथा, उनके दिव्य स्वरूप और पूजा की संपूर्ण विधि।
मां चंद्रघंटा कौन हैं? जानें पौराणिक कथा
Maa Chandraghanta पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान शिव से विवाह के बाद माता पार्वती ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया। चंद्रमा का आकार घंटे जैसा होने के कारण देवी का नाम चंद्रघंटा पड़ा। उनका यह स्वरूप शांति और शक्ति के अद्भुत संगम का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि जब देवताओं पर दुष्ट शक्तियों का संकट बढ़ा, तब मां चंद्रघंटा ने योद्धा का रूप धारण कर उनका मुकाबला किया। देवी की दिव्य शक्ति और प्रचंड गर्जना से असुरी शक्तियां भयभीत हो गईं। इस तरह मां का स्वरूप भक्तों को अन्याय और बुराई के खिलाफ खड़े होने का संदेश देता है।
कैसा दिखाई देता है मां चंद्रघंटा का दिव्य स्वरूप?
Maa Chandraghanta मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और आकर्षक माना जाता है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। देवी को लाल वस्त्रों, स्वर्ण आभूषणों और पुष्पमालाओं से सुसज्जित दर्शाया जाता है।
मां के दस हाथ बताए गए हैं, जिनमें त्रिशूल, तलवार, गदा, धनुष-बाण और कमल सहित विभिन्न अस्त्र-शस्त्र तथा प्रतीक विराजमान रहते हैं। उनका वाहन सिंह है, जो शक्ति, निर्भयता और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है।
देवी का यह स्वरूप एक ओर दुष्ट शक्तियों का संहार करने वाली शक्ति को दर्शाता है, तो दूसरी ओर उनकी शांत मुद्रा प्रेम, करुणा और भक्तों के प्रति वात्सल्य का संदेश देती है।
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि
Maa Chandraghanta नवरात्रि के तीसरे दिन माता की पूजा करते समय इन आसान चरणों का पालन कर सकते हैं।
- सुबह स्नान करें: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें।
- दीपक जलाएं: मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा का संकल्प लें।
- पूजन सामग्री अर्पित करें: माता को फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार फल और अन्य पूजन सामग्री भी चढ़ा सकते हैं।
- भोग लगाएं: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा को दूध, खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
- घंटी और शंख बजाएं: पूजा के दौरान घंटी या शंख बजाकर माता का स्मरण करें।
- मंत्र जाप करें: मां चंद्रघंटा के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा शांति की प्रार्थना करें।
- आरती करें: पूजा के अंत में मां की आरती करके सभी के कल्याण की कामना करें।
मां चंद्रघंटा का पूजा मंत्र
Maa Chandraghanta नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है।
ॐ देवी चंद्रघण्टायै नमः॥
मान्यता है कि मंत्र जाप और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मन को एकाग्र करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।
मां चंद्रघंटा की पूजा का क्या है धार्मिक महत्व?
Maa Chandraghanta धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों को साहस, संयम और सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा मिलती है। देवी का स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन में शांति बनाए रखने के साथ अन्याय और कठिनाइयों का दृढ़ता से सामना करना भी जरूरी है।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां की पूजा करके भक्त अपने जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। पूजा के दौरान श्रद्धा, स्वच्छता और मन की एकाग्रता का विशेष महत्व माना जाता है।
Disclaimer: लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पौराणिक कथाओं पर आधारित है।

