Supaul:सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड में ICDS (बाल विकास परियोजना) महकमे से जुड़ा एक कथित रिश्वतखोरी का मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों से कथित रूप से हर महीने वसूली करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसके बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला मजिस्ट्रेट (DM) सावन कुमार ने इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
Supaul:यह पूरा विवाद छातापुर प्रखंड स्थित सीडीपीओ (CDPO) कार्यालय से जुड़ा है। आरोप है कि यहाँ तैनात महिला पर्यवेक्षिका (सुपरवाइजर) संगीता कुमारी आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन, वाउचर भुगतान, THR (Take Home Ration), और क्रय पंजी संधारण के नाम पर सेविकाओं से अवैध वसूली करती हैं।
जीवछपुर पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-52 की सेविका ममता कुमारी ने आरोप लगाया है कि सुपरवाइजर द्वारा उनसे हर महीने 2,600 रुपये की रिश्वत ली जाती है। सेविका ने एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें कथित तौर पर सुपरवाइजर कार्यालय के भीतर पैसे गिनते हुए दिखाई दे रही हैं। सेविका का दावा है कि यह वीडियो उनके पति द्वारा रिकॉर्ड किया गया था, जिसमें पैसे कम होने को लेकर भी बातचीत सुनी जा सकती है। हालांकि, इस वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
अतिरिक्त पैसों की मांग और दबाव का आरोप
Supaul:सेविका ममता कुमारी का यह भी कहना है कि पिछले दो महीनों के वाउचर पास करवाने के एवज में उनसे 10,000 रुपये की अतिरिक्त मांग की गई थी। जब उन्होंने इस अवैध मांग का विरोध किया, तो उन पर वायरल वीडियो को डिलीट करने का भारी दबाव बनाया जाने लगा। इस घटना के सामने आने के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों में चल रही कथित मासिक वसूली की प्रथा को लेकर विभागीय अधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सुपरवाइजर की सफाई
Supaul:दूसरी ओर, आरोपी महिला सुपरवाइजर संगीता कुमारी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि वीडियो में जो पैसे लिए जा रहे हैं, वे रिश्वत के नहीं बल्कि दवा के बकाए के 2,600 रुपये हैं। उनके दावे के मुताबिक, यह राशि एक ग्राहक द्वारा डॉक्टर विनय कुमार से इलाज करवाने के एवज में दी गई थी और वायरल वीडियो को दुर्भावनापूर्ण तरीके से पेश किया जा रहा है।
डीएम के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई
Supaul:मामले की गंभीरता को देखते हुए सुपौल डीएम ने छातापुर की सीडीपीओ को तत्काल प्रभाव से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तीन दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी। रिपोर्ट आने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

