SupaulSupaul
Spread the love

रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर

Supaul : बिहार के सुपौल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान रुक्मणी विवाह प्रसंग के वाचन से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। अयोध्याधाम से पधारीं कथा वाचिका व्यास सोनम जी ने भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के अलौकिक विवाह की कथा अत्यंत भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत की। प्रसंग के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मणी हरण और पाणिग्रहण संस्कार की बात आई, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर विवाह उत्सव का आनंद उठाया और पूरा पंडाल ‘राधे-राधे’ तथा ‘जय श्री कृष्णा’ के जयकारों से गूंज उठा।

जीव और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है रुक्मणी विवाह

Supaul कथा वाचिका व्यास सोनम जी ने रुक्मणी जी द्वारा भेजे गए पत्र से लेकर द्वारका में हुए विधिवत विवाह तक की कथा का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि रुक्मणी जी ने अपने मन में श्रीकृष्ण को पति रूप में स्वीकार कर लिया था। उनकी निश्छल भक्ति, समर्पण और अटूट प्रेम से प्रसन्न होकर प्रभु स्वयं विदर्भ पहुंचे। व्यास जी ने समझाया कि रुक्मणी विवाह केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि यह जीव (आत्मा) और परमात्मा के पवित्र मिलन का दिव्य संदेश है। यदि भक्त सच्चे मन और समर्पण के साथ ईश्वर को पुकारता है, तो भगवान उसकी पुकार अवश्य सुनते हैं।

सजीव झांकी और भजनों पर झूमे श्रद्धालु

Supaul कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के विवाह की भव्य एवं आकर्षक सजीव झांकी प्रस्तुत की गई, जो सभी के आकर्षण का केंद्र बनी। विवाह उत्सव के उपलक्ष्य में भक्ति संगीत और भजनों की धुनों पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे। इस दौरान आयोजन स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने नवदंपति स्वरूप की झांकी पर फूल बरसाए और आरती उतारी।

मेले में उमड़ी भीड़, झूले और मीना बाजार बने मुख्य आकर्षण

Supaul धार्मिक आयोजन के साथ-साथ परिसर में लगे मेले में भी श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का सैलाब उमड़ रहा है। मेले में बच्चों और युवाओं के लिए टोरा-टोरा, टावर झूला, सुनामी झूला और मिकी माउस जैसे मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं महिलाओं के लिए लगा मीना बाजार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां श्रृंगार और घरेलू सामान की खूब बिक्री हो रही है। आयोजन समिति के अध्यक्ष राम लखन चौधरी, सचिव ललन कुमार, कोषाध्यक्ष बैजनाथ कुमार (बैजू) और मेला प्रभारी सुमन गुप्ता समेत पूरी टीम व्यवस्था को सुचारू बनाने में जुटी हुई है।

ये भी पढ़े: जामताड़ा के बड़जोड़ा में करम महोत्सव की धूम: 30 गांवों के श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब, 21 अखड़ा टीमों ने बांधा समां