रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर
Supaul : बिहार के सुपौल में निजी स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यशैली एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। जिला मुख्यालय स्थित ‘लाइफ लाइन अस्पताल’ पर एक मरीज के परिजनों ने डरा-धमकाकर अधिक पैसे वसूलने, फर्जी तरीके से आईसीयू में भर्ती करने और अभद्र व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित पक्ष ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत जिलाधिकारी (DM) और सिविल सर्जन से करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
ऑटो चालक ले गया निजी अस्पताल, डराकर आईसीयू में किया भर्ती
Supaul पीड़ित रामजी कुमार (निवासी रामनगर, थाना पिपरा) के अनुसार, 20 सितंबर 2026 को उनके पिता की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। वे उन्हें इलाज के लिए सुपौल सदर अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ऑटो चालक झांसा देकर उन्हें लाइफ लाइन अस्पताल ले गया। आरोप है कि अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर बताकर उन्हें सीधे आईसीयू में भर्ती कर लिया और परिजनों में डर का माहौल बना दिया।
25 हजार रुपये वसूलने के बाद भी मांगे और पैसे, मांगने पर नहीं दी डिस्चार्ज समरी
Supaul आवेदक का दावा है कि भर्ती कराने के कुछ ही घंटों के भीतर जांच और दवाइयों के नाम पर उनसे लगभग 25,000 रुपये जमा करवा लिए गए। इसके बाद भी जब प्रबंधन की ओर से और पैसों का दबाव बनाया जाने लगा, तो परिजनों ने मरीज को डिस्चार्ज करने और डॉक्टर से मिलने की बात कही। इस पर अस्पताल कर्मियों ने उनके साथ कथित रूप से अभद्रता और बदसलूकी की। आरोप यह भी है कि मरीज को बिना किसी आधिकारिक डिस्चार्ज समरी या ओरिजिनल जांच रिपोर्ट के, महज एक फोटोकॉपी थमाकर बाहर निकाल दिया गया।
अस्पताल परिसर में शराब मिलने का दावा, जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
Supaul पीड़ित का कहना है कि अस्पताल से बाहर लाते ही उनके पिता की स्थिति सामान्य पाई गई, जिससे आईसीयू भर्ती की नीयत पर सवाल उठते हैं। इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ता ने अस्पताल परिसर में शराब की खाली बोतलें मिलने का भी आरोप लगाया है और इसका वीडियो साक्ष्य के तौर पर होने का दावा किया है। फिलहाल इन सभी आरोपों पर प्रशासन की ओर से स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से जांच कर दोषी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

