Ganesh ChaturthiGanesh Chaturthi
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By: Ravindra Singh

Ganesh Chaturthi : भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। सनातन परंपरा में इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था। इसी वजह से गणेश चतुर्थी पर श्रद्धालु भगवान गणपति की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं।

गणेश चतुर्थी का उत्सव कई स्थानों पर लगातार दस दिनों तक चलता है। पूजा के दौरान भगवान गणेश से सुख-समृद्धि, बुद्धि और विघ्नों से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत-पूजन के साथ गणेश जी की जन्म कथा का श्रवण या पाठ करना भी शुभ माना जाता है।

कैसे हुआ भगवान गणेश का जन्म?

Ganesh Chaturthi पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। उस समय उनके द्वार पर ऐसा कोई नहीं था जो उनकी अनुमति के बिना किसी को अंदर आने से रोक सके। तब माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक का स्वरूप बनाया और उसमें प्राणों का संचार कर दिया।

माता ने उस बालक को अपना पुत्र माना और उसका नाम गणेश रखा। स्नान के लिए जाते समय उन्होंने गणेश को द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया और कहा कि उनकी अनुमति के बिना किसी को भी भीतर प्रवेश न करने दिया जाए। गणेश जी अपनी माता की आज्ञा का पालन करते हुए द्वार पर खड़े हो गए।

भगवान शिव और गणेश जी के बीच हुआ संघर्ष

Ganesh Chaturthi कुछ समय बाद भगवान शिव वहां पहुंचे और माता पार्वती से मिलने के लिए भीतर जाने लगे। लेकिन गणेश जी ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि माता की अनुमति के बिना वह किसी को अंदर नहीं जाने देंगे।

भगवान शिव ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन गणेश जी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे। बात बढ़ने पर दोनों पक्षों में संघर्ष की स्थिति बन गई। कई देवी-देवताओं ने भी गणेश जी को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह माता पार्वती के आदेश का पालन करने पर अडिग रहे।

अंततः भगवान शिव और गणेश जी के बीच युद्ध हुआ। क्रोधित होकर शिव जी ने अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया।

पुत्र को मृत देखकर माता पार्वती हुईं क्रोधित

Ganesh Chaturthi जब माता पार्वती स्नान के बाद बाहर आईं और उन्होंने अपने पुत्र को मृत अवस्था में देखा, तो उनका क्रोध अत्यंत बढ़ गया। उन्होंने सृष्टि का विनाश करने का संकल्प ले लिया। माता के इस रौद्र रूप से सभी देवी-देवता चिंतित हो उठे।

स्थिति को शांत करने के लिए भगवान शिव ने गणेश जी को दोबारा जीवन देने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने गणों को आदेश दिया कि वे उत्तर दिशा की ओर जाएं और ऐसे प्राणी का सिर लेकर आएं जिसकी माता अपने बच्चे की ओर पीठ करके सो रही हो।

हाथी के मस्तक से मिला गणेश जी को नया जीवन

Ganesh Chaturthi भगवान शिव के आदेश पर गण उस प्राणी की तलाश में निकल पड़े। काफी खोज के बाद उन्हें एक हथिनी दिखाई दी, जो अपने बच्चे से विपरीत दिशा में मुंह करके सो रही थी। गण उसके बच्चे का सिर लेकर भगवान शिव के पास लौट आए।

इसके बाद शिव जी ने हाथी का मस्तक गणेश जी के धड़ पर स्थापित किया और उन्हें पुनर्जीवित कर दिया। गणेश जी को जीवित देखकर माता पार्वती का क्रोध शांत हुआ और वह प्रसन्न हो गईं।

क्यों कहलाए भगवान गणेश ‘प्रथम पूज्य’?

Ganesh Chaturthi गणेश जी को नया जीवन मिलने के बाद भगवान शिव सहित सभी देवी-देवताओं ने उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। भगवान शिव ने गणेश जी को यह वरदान दिया कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा या धार्मिक अनुष्ठान से पहले सबसे पहले उनकी आराधना की जाएगी।

इसी धार्मिक मान्यता के कारण भगवान गणेश को ‘प्रथम पूज्य’ कहा जाता है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से करने की परंपरा आज भी प्रचलित है। माना जाता है कि गणपति की पूजा करने से कार्य में आने वाले विघ्न दूर होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

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