Maa Jwala DeviMaa Jwala Devi
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By: Ravindra Singh

Maa Jwala Devi : हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मां ज्वाला देवी मंदिर देश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में शामिल है। यह पवित्र स्थल भगवान शिव और आदिशक्ति को समर्पित माना जाता है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं और रहस्यमयी प्राकृतिक ज्वालाओं के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।

मां सती की जीभ गिरी थी यहां

Maa Jwala Devi पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता सती के शरीर के अलग-अलग अंग जहां गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। मान्यता है कि कांगड़ा स्थित ज्वाला देवी मंदिर में माता सती की जीभ गिरी थी। इसी वजह से इस स्थान को बेहद शक्तिशाली और पवित्र तीर्थ माना जाता है।

बिना तेल-बाती के जलती हैं नौ ज्वालाएं

Maa Jwala Devi ज्वाला देवी मंदिर की सबसे खास विशेषता यहां प्राकृतिक रूप से प्रज्वलित रहने वाली ज्योतियां हैं। मान्यता के अनुसार, मंदिर में लंबे समय से बिना तेल, घी या किसी अन्य ईंधन के नौ ज्वालाएं जल रही हैं।

इनमें मुख्य ज्योति को महालक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है। इसके अलावा अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंबिका और अंजी देवी के स्वरूपों की भी यहां आराधना की जाती है।

गोरखनाथ से जुड़ी है रोचक मान्यता

Maa Jwala Devi ज्वाला देवी मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित कथा गुरु गोरखनाथ से संबंधित है। कहा जाता है कि गोरखनाथ माता के परम भक्त थे और उन्होंने यहां देवी की साधना की थी।

एक बार उन्हें तेज भूख लगी तो उन्होंने माता से कहा कि वे पानी गर्म करने के लिए अग्नि जला दें, जबकि वह भिक्षा लेने के लिए बाहर जा रहे हैं। माता ने उनके लिए अग्नि प्रज्वलित कर दी, लेकिन गोरखनाथ वापस नहीं लौटे।

मान्यता है कि तभी से माता उसी अग्नि के माध्यम से उनके लौटने की प्रतीक्षा कर रही हैं। श्रद्धालुओं में यह विश्वास भी प्रचलित है कि सतयुग में गोरखनाथ के लौटने तक यह पवित्र ज्योति इसी प्रकार प्रज्वलित रहेगी।

‘गोरख डिब्बी’ भी है मंदिर का आकर्षण

Maa Jwala Devi ज्वाला देवी मंदिर परिसर के आसपास एक रहस्यमयी जलस्रोत भी है, जिसे ‘गोरख डिब्बी’ के नाम से जाना जाता है। इसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे पानी लगातार उबल रहा हो, लेकिन मान्यता के अनुसार स्पर्श करने पर इसका पानी ठंडा महसूस होता है।

इसी अनोखी विशेषता के कारण गोरख डिब्बी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

अकबर भी नहीं बुझा सके थे ज्वाला

Maa Jwala Devi ज्वाला देवी मंदिर से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा मुगल सम्राट अकबर से भी संबंधित है। कहा जाता है कि अकबर ने मंदिर की प्राकृतिक ज्वाला को बुझाने का प्रयास किया था। इसके लिए उन्होंने ज्वाला को ढकने और पानी का इस्तेमाल करने जैसे कई उपाय किए, लेकिन कथित तौर पर वे सफल नहीं हो सके।

इस घटना के बाद अकबर ने देवी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए मंदिर में स्वर्ण छत्र चढ़ाया। लोकमान्यता के अनुसार, देवी की शक्ति के प्रति संदेह के कारण वह छत्र किसी अज्ञात धातु में परिवर्तित हो गया। इसके बाद अकबर की आस्था देवी के प्रति और गहरी हो गई।

आस्था और रहस्य का अनोखा संगम

Maa Jwala Devi मां ज्वाला देवी का मंदिर धार्मिक आस्था, पौराणिक कथाओं और प्राकृतिक रहस्य का अनूठा संगम माना जाता है। यहां लगातार प्रज्वलित रहने वाली ज्योतियां, गोरख डिब्बी और मंदिर से जुड़ी प्राचीन मान्यताएं इसे हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान देती हैं।

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