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गोहद विधायक केशव देसाई ने उपमुख्यमंत्री से की शिकायत, लाखों रुपये के स्टाम्प शुल्क में गड़बड़ी का लगाया आरोप

भिंड। गोहद उप पंजीयक कार्यालय से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। गोहद विधायक केशव देसाई ने उप पंजीयक श्वेता चंदेरिया पर रजिस्ट्री में जमीन की प्रकृति गलत दर्शाकर शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। विधायक का दावा है कि मामले में 50 लाख रुपये से अधिक के स्टाम्प शुल्क की अनियमितता हुई।

फैक्ट्री वाली जमीन को बताया कृषि भूमि

विधायक के अनुसार, गोहद क्षेत्र में स्थित सुरेश राइस मिल की जमीन पर फैक्ट्री का निर्माण होने के बावजूद दस्तावेजों में उसे कृषि भूमि के रूप में दर्शाकर रजिस्ट्री की गई। आरोप है कि निर्माण वाली जमीन को रजिस्ट्री में खाली कृषि खेत के तौर पर प्रदर्शित किया गया, जिससे स्टाम्प शुल्क कम निर्धारित हुआ और शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचा।

केशव देसाई ने इस मामले में उप पंजीयक, खरीदार और दस्तावेज तैयार करने वाले वेंडर के बीच मिलीभगत होने का आरोप लगाया है। विधायक ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

उपमुख्यमंत्री से भी की शिकायत

गोहद विधायक ने इस मामले को लेकर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के समक्ष शिकायत किए जाने की जानकारी दी है। उनका कहना है कि उन्होंने विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन इसके बावजूद संबंधित अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

विधायक का आरोप है कि मामला सामने आने के बाद संबंधित उप पंजीयक ने खरीदार से बकाया स्टाम्प शुल्क की राशि जमा करवाई। हालांकि, उनका सवाल है कि यदि राजस्व की वसूली बाद में की गई, तो रजिस्ट्री के दौरान हुई कथित अनियमितता के लिए जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

प्रत्येक रजिस्ट्री पर पैसे लेने का भी आरोप

केशव देसाई ने उप पंजीयक कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। विधायक ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री के लिए प्रत्येक दस्तावेज पर कथित तौर पर 10 हजार रुपये लिए जाते हैं और दलालों के माध्यम से भी लेनदेन होने की बात कही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यालय परिसर में दलालों की सक्रियता बनी हुई है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। स्टाम्प शुल्क में वास्तविक कितनी अनियमितता हुई और रजिस्ट्री में जमीन की प्रकृति किस आधार पर दर्ज की गई, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

विधायक ने सरकार से पूरे मामले की जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।