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रिपोर्टर: रतना मिश्रा

Saharsa Kosi River Erosion Work Collapse : कहा जाता है कि कोसी नदी की विनाशकारी धारा सिर्फ उपजाऊ जमीन ही नहीं लीलती, बल्कि अगर प्रशासनिक स्तर पर घोर लापरवाही हो, तो जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये भी अपने बहाव में बहा ले जाती है। कुछ ऐसा ही बेहद चिंताजनक मामला बिहार के सहरसा जिले से सामने आया है, जहाँ नवहट्टा प्रखंड के कोसी तटबंध के भीतर बसे सत्तोर पंचायत के नारायणपुर गांव में करोड़ों की लागत से बना फ्लड फाइटिंग (कटाव निरोधक) ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह गया।

Saharsa Kosi River Erosion Work Collapse हल्की लहरें भी नहीं झेल सकी करोड़ों की सरकारी योजना

नारायणपुर गांव को कोसी के भीषण कटाव से सुरक्षित रखने और ग्रामीणों के आशियाने व खेतों को बचाने के उद्देश्य से इस कटाव निरोधक कार्य की शुरुआत की गई थी। लेकिन ग्रामीणों का सीधा और गंभीर आरोप है कि इस निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। इसका नतीजा यह हुआ कि नदी का जलस्तर अभी सामान्य ही था और लहरें बिल्कुल हल्की थीं, लेकिन यह कमजोर ढांचा कोसी के इस सामान्य बहाव को भी बर्दाश्त नहीं कर सका और देखते ही देखते नदी में समा गया।

Saharsa Kosi River Erosion Work Collapse संवेदक और अधिकारियों के गठजोड़ पर फूटा गुस्सा

इस घटना के बाद से पूरे इलाके के लोगों में जबरदस्त आक्रोश और दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि संवेदक (ठेकेदार) और संबंधित विभाग के अभियंताओं (इंजीनियरों) की मिलीभगत के कारण काम में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। योजना के अचानक जमींदोज होने से अब पूरे गांव पर सीधे बाढ़ और कटाव का खतरा मंडराने लगा है। स्थानीय निवासियों को डर है कि यदि आने वाले दिनों में कोसी का जलस्तर जरा भी बढ़ा, तो पूरी आबादी सीधे नदी के निशाने पर आ जाएगी।

Saharsa Kosi River Erosion Work Collapse उठ रहे हैं बड़े सवाल: आखिर किसकी निगरानी में हुआ भ्रष्टाचार?

करोड़ों के बजट वाली इस महत्वपूर्ण योजना के चंद दिनों में ही तबाह हो जाने के बाद अब सरकारी तंत्र, निगरानी प्रणाली और धन के सदुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं:

  • इस पूरी निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग के लिए किस अधिकारी को जवाबदेह बनाया गया था?
  • क्या काम पूरा होने के बाद इसकी गुणवत्ता की कोई आधिकारिक जांच की गई थी?
  • यदि तकनीकी जांच हुई थी, तो नदी के इतने सामान्य बहाव में यह पूरी योजना कैसे ध्वस्त हो गई?

नारायणपुर के ग्रामीणों ने बिहार सरकार और जिला प्रशासन से इस पूरे घोटाले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने, दोषी ठेकेदार व लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और इस कटाव निरोधक कार्य को दोबारा पूरी मजबूती के साथ कराने की पुरजोर मांग की है।

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