Amarnath Yatra Third Route Ladakh Minamarg : बाबा बर्फानी के भक्तों के लिए एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। श्री अमरनाथ धाम की दुर्गम यात्रा को अब और अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए तीसरे वैकल्पिक मार्ग पर काम शुरू हो चुका है। यह नया और प्रस्तावित रास्ता केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के मीनामर्ग को कश्मीर घाटी में स्थित समुद्र तल से 12,756 फीट की ऊंचाई पर बनी अमरनाथ की पवित्र गुफा से सीधे जोड़ेगा।
Amarnath Yatra Third Route Ladakh Minamarg महज 6 किलोमीटर का होगा सफर, दर्शन कर उसी दिन लौट सकेंगे श्रद्धालु
वर्तमान समय में अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए दो पारंपरिक रास्ते मौजूद हैं—पहला बालटाल (14 किलोमीटर) और दूसरा पहलगाम (लगभग 34 किलोमीटर)। इन दोनों की तुलना में लद्दाख से बनने वाला यह तीसरा मार्ग बेहद छोटा होगा, जिसकी कुल लंबाई मात्र 6 किलोमीटर के करीब होगी। इस रास्ते के खुल जाने के बाद श्रद्धालु बेहद कम समय में, यानी महज एक ही दिन के भीतर बाबा बर्फानी के दर्शन कर वापस लौट सकेंगे। लद्दाख आने वाले पर्यटक भी आसानी से अपनी यात्रा में अमरनाथ दर्शन को शामिल कर सकेंगे।
Amarnath Yatra Third Route Ladakh Minamarg सिंधु महाकुंभ में उठी थी मांग, एलजी ने दिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश
लद्दाख से पवित्र गुफा तक के लिए एक वैकल्पिक मार्ग की मांग काफी समय से की जा रही थी। पिछले दिनों लद्दाख में आयोजित ‘सिंधु महाकुंभ’ के दौरान लेह स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद के पूर्व मुख्य कार्यकारी पार्षद ताशी ग्यालसन ने इस मुद्दे को दोबारा प्रमुखता से उठाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए लद्दाख के उपराज्यपाल (एलजी) विनय कुमार सक्सेना ने इस परियोजना को लेकर एक विस्तृत कार्ययोजना (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस संदर्भ में सीमा सड़क संगठन (BRO) के साथ भी उच्च स्तरीय चर्चा शुरू हो चुकी है।
Amarnath Yatra Third Route Ladakh Minamarg जोजिला सुरंग और सुरक्षित भौगोलिक स्थिति से सर्दियों में भी राह होगी आसान
अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रस्तावित मार्ग निर्माणाधीन जोजिला सुरंग के पूर्वी मुहाने (मीनामर्ग-द्रास) से शुरू होगा। जब जोजिला सुरंग बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगी, तो कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी बहाल रहेगी, जिससे यह मार्ग सर्दियों में भी उपयोग के योग्य रह सकता है। इसके अलावा, भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका बालटाल और पहलगाम की तुलना में कम संकरा और अधिक सुरक्षित है। यहाँ की घाटियां चौड़ी हैं, जिससे भविष्य में श्रद्धालुओं के लिए टेंट, लंगर और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं स्थापित करने के लिए पर्याप्त और सुरक्षित जगह मिल सकेगी। इस मार्ग के चालू होने से बाकी दोनों रास्तों पर तीर्थयात्रियों का दबाव भी काफी कम हो जाएगा।

