Strait of HormuzStrait of Hormuz
Spread the love

France military deployment Strait of Hormuz : मध्य-पूर्व (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच फ्रांस ने दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में अपनी नौसैनिक उपस्थिति को मजबूत करने का बड़ा फैसला किया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए फ्रांस वहां अतिरिक्त युद्धपोत और सैन्य उपकरण तैनात कर रहा है। इस कदम को वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

France military deployment Strait of Hormuz वैश्विक अर्थव्यवस्था की ‘जीवनरेखा’ और फ्रांस की नई रणनीति

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वैश्विक व्यापार की रीढ़ कहा जाता है, क्योंकि खाड़ी देशों को अरब सागर से जोड़ने वाले इसी संकरे रास्ते से होकर दुनिया के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस (LNG) का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया में महंगाई और ऊर्जा संकट पैदा कर सकता है। इसी खतरे को भांपते हुए फ्रांस ने क्षेत्र में दो अत्याधुनिक माइनहंटर (समुद्री बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने वाले जहाज), दो फ्रिगेट (युद्धपोत) और एक समुद्री गश्ती विमान भेजने का फैसला किया है। हालांकि, फ्रांस का मुख्य विमानवाहक पोत ‘चार्ल्स डी गॉल’ अपने बेस पर वापस लौट रहा है, लेकिन इसके बावजूद वहां सुरक्षा ऑपरेशन लगातार जारी रहेगा।

France military deployment Strait of Hormuz ब्रिटेन का साथ और ‘मल्टीनेशनल मिलिट्री मिशन’ के संकेत

फ्रांस के इस सुरक्षा कदम को ब्रिटेन का भी पूरा समर्थन मिला है। दोनों देशों ने एक साझा बयान जारी कर इस जलमार्ग को वैश्विक अर्थव्यवस्था की “जीवनरेखा” बताया और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन की वकालत की। इस रणनीतिक साझेदारी में ओमान ने भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सहयोग देने पर सहमति जताई है। ब्रिटेन और फ्रांस ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि आने वाले समय में हालात और बिगड़ते हैं, तो वे अपने अन्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर एक ‘बहुराष्ट्रीय सैन्य मिशन’ (Multinational Military Mission) तैनात करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

France military deployment Strait of Hormuz अमेरिका-ईरान समझौता और वैश्विक बाजारों को राहत

राष्ट्रपति मैक्रों ने हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। ओमान के सुल्तान से चर्चा के बाद फ्रांस ने इस बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुसार अपनी सेनाओं को तैनात किया है। फ्रांस की इस सक्रियता से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और वैश्विक ऊर्जा आयात करने वाले देशों ने राहत की सांस ली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग पर स्थिरता रहने से वैश्विक सप्लाई चेन बिना किसी रुकावट के चलती रहेगी।

ये भी पढ़े: Dongargarh Hostel tree cutting case: तत्कालीन अधीक्षक पर गिरेगी गाज, विभाग ने शुरू की जांच

You missed