रिपोर्टर: वेदान्त साहू
NOTTO Kidney Transplant Data Guidelines : देश में किडनी ट्रांसप्लांट (Kidney Transplant) कराने वाले मरीजों के हित में राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब देश के सभी किडनी ट्रांसप्लांट सेंटरों और अस्पतालों को अपने यहां हुए ऑपरेशनों की सफलता दर, मरीजों के जीवित रहने के आंकड़े (Survival Rate) और ऑर्गन फेलियर (Graft Failure) की जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर सार्वजनिक करनी होगी। इस कदम से स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी और मरीजों को सही फैसला लेने में मदद मिलेगी।
NOTTO Kidney Transplant Data Guidelines सांसद की पहल पर जागा NOTTO, छिपे हुए आंकड़ों पर जताई चिंता
यह महत्वपूर्ण निर्देश बीजेपी सांसद कैप्टन ब्रजेश चौटा द्वारा स्वास्थ्य मंत्रालय का ध्यान आकर्षित करने के बाद जारी किया गया है। सांसद ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को सौंपे एक ज्ञापन में मंगलुरु के दो मामलों का हवाला देते हुए बताया था कि अस्पताल अक्सर सफल ट्रांसप्लांट का प्रचार तो करते हैं, लेकिन लंबे समय में होने वाली जटिलताओं, ऑर्गन फेलियर और मरीजों की मौत के आंकड़ों को सामने नहीं लाते। राष्ट्रीय रजिस्ट्री न होने के कारण मरीजों को अस्पतालों के वास्तविक प्रदर्शन का पता नहीं चल पाता था।
NOTTO Kidney Transplant Data Guidelines मानक फॉर्मेट तैयार: 5 साल तक का देना होगा पूरा फॉलो-अप डेटा
NOTTO के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। नए नियम के तहत अब अस्पतालों को एक निर्धारित मानक फॉर्मेट में आंकड़े जारी करने होंगे। अस्पतालों को किडनी ट्रांसप्लांट के बाद निम्नलिखित समयावधि का डेटा प्रमुखता से वेबसाइट पर दिखाना होगा:
- डिस्चार्ज के समय की स्थिति
- ट्रांसप्लांट के 6 महीने और 1 साल बाद की रिपोर्ट
- 3 साल और 5 साल बाद जीवित मरीजों और ऑर्गन फेलियर का प्रतिशत
इसके साथ ही, अस्पतालों के लिए ‘नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट रजिस्ट्री’ को समय पर पूरा फॉलो-अप डेटा सौंपना अनिवार्य कर दिया गया है। सर्जरी से पहले मरीजों और उनके परिजनों को इलाज से जुड़े सभी जोखिमों की लिखित जानकारी देना भी अब जरूरी होगा।
NOTTO Kidney Transplant Data Guidelines डॉक्टरों ने बताया ऐतिहासिक कदम, मरीजों को मिलेगी सही राह
दिल्ली (द्वारका) स्थित आकाश अस्पताल के नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. अनुपम रॉय सहित देश के कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने इस फैसले का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रांसप्लांट के नतीजों को सार्वजनिक करने से अस्पतालों की जवाबदेही तय होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन आंकड़ों को देखते समय मरीज की बीमारी की जटिलता और उसकी क्रिटिकल स्थिति (Risk Profile) को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस व्यवस्था के लागू होने से मरीज बिना किसी असमंजस के अपने लिए सबसे बेहतरीन और सुरक्षित मेडिकल सेंटर का चुनाव कर सकेंगे।

