Aliganj Fire Incident LDA Illegal ConstructionAliganj Fire Incident LDA Illegal Construction
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रिपोर्टर: योगेन्‍द्र सिंह

Aliganj Fire Incident LDA Illegal Construction : लखनऊ के पॉश इलाके अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब इस पूरी घटना में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा प्रशासनिक खुलासा हुआ है। जिस बहुमंजिला इमारत में यह दर्दनाक हादसा हुआ, उसके पुराने सरकारी दस्तावेजों और फाइलों ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2016 में एलडीए ने इस भवन में हुए अवैध निर्माण को गिराने (ध्वस्तीकरण) का आधिकारिक आदेश जारी किया था। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से महज दो महीने के भीतर ही इस कड़े आदेश को फाइलों में दबाकर निरस्त कर दिया गया। अब इस खुलासे के बाद हादसे के असली गुनहगारों और जिम्मेदार अफसरों पर सवाल उठने लगे हैं।

Aliganj Fire Incident LDA Illegal Construction आवासीय नक्शे पर खड़ी कर दी कमर्शियल बिल्डिंग, 4 दशक पुराना है इतिहास

अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित इस भवन (संख्या: एमएस/102/डी) का इतिहास करीब 46 साल पुराना है। यह प्लॉट पहली बार 1980 में किराया-क्रय पद्धति के तहत आवंटित हुआ था, जो कई बार बिकने के बाद साल 2013 में वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला के पास पहुंचा।

  • नक्शे की हकीकत: करीब 1992 वर्ग फीट के इस भूखंड का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को एलडीए से पास कराया गया था।
  • नियमों का उल्लंघन: यह नक्शा पूरी तरह से ‘आवासीय उपयोग’ (Residential Use) के लिए स्वीकृत किया गया था, लेकिन इसके बाद भू-माफियाओं और मालिकों ने नियमों को ताक पर रखकर स्वीकृत मानचित्र के विपरीत यहाँ अनधिकृत और भारी अवैध निर्माण खड़ा कर दिया।

Aliganj Fire Incident LDA Illegal Construction मुकदमा नंबर 08/2016 और वो ‘रहस्यमयी’ दो महीने, जिसने टाल दी कार्रवाई

इमारत में हो रहे इस अवैध निर्माण के खिलाफ शिकायतों के बाद एलडीए ने तत्कालीन भवन स्वामी वीरेंद्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या 08/2016 दर्ज किया था।

  • 10 मई 2016: जांच में शिकायत सही पाए जाने पर विहित प्राधिकारी ने अवैध निर्माण को पूरी तरह से ध्वस्त करने का अंतिम आदेश पारित कर दिया।
  • 5 जुलाई 2016: इस सख्त आदेश के जारी होने के ठीक 55 दिन बाद, यानी 2 महीने से भी कम समय में इस आदेश को अचानक निरस्त (रद्द) कर दिया गया।

अब सबसे बड़ा सस्पेंस और सवाल यही है कि अगर निर्माण अवैध था, तो किस रसूख या लेनदेन के चक्कर में इस विध्वंस आदेश को वापस लिया गया? और अगर आदेश गलत था, तो उसे पहली बार में जारी ही क्यों किया गया था?

Aliganj Fire Incident LDA Illegal Construction हादसे के बाद एलडीए के भ्रष्ट तंत्र पर भड़की जनता, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

अलीगंज के इस भीषण अग्निकांड में भारी जनहानि और संपत्ति के नुकसान के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि साल 2016 में ही एलडीए ने इस अवैध और असुरक्षित इमारत पर बुलडोजर चला दिया होता, तो आज यह दर्दनाक हादसा कभी नहीं होता। अब सरकार से मांग की जा रही है कि अग्निकांड की जांच के दायरे में साल 2016 के उस आदेश निरस्तीकरण की फाइल को भी शामिल किया जाए और यह पता लगाया जाए कि किस अधिकारी की शह पर इस मौत की इमारत को अभयदान दिया गया था।

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