रिपोर्टर: रतन कुमार
Jamtara : झारखंड के जामताड़ा जिले में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर रसोईया और संयोजिकाओं ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। शुक्रवार को ‘झारखंड राज्य रसोईया संयोजिका यूनियन’ (जिला कमेटी जामताड़ा) के बैनर तले समाहरणालय के सामने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। मुकिमा बीबी की अध्यक्षता और मोहन मंडल के संचालन में आयोजित इस सभा में वक्ताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी और स्कीम वर्करों के शोषण का गंभीर आरोप लगाया।
Jamtara ₹2000 मानदेय को बताया मजाक, सरकार पर लगाया छलावे का आरोप
धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू (CITU) नेता चंडी दास पुरी ने कहा कि स्कूलों में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना को सुचारू रूप से चलाने वाली रसोईया-संयोजिकाओं को हर महीने महज ₹2000 मानदेय दिया जा रहा है, जो इस महंगाई के दौर में उनके साथ एक भद्दा मजाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने मानदेय में ₹1000 की बढ़ोतरी का एलान किया था, लेकिन सिर्फ एक-दो महीने ही ₹3000 दिए गए और फिर से पुरानी व अनियमित दर पर भुगतान शुरू कर दिया गया।
Jamtara ये हैं रसोईया-संयोजिकाओं की प्रमुख 8 सूत्री मांगें
यूनियन के नेताओं ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि जब तक स्थाईकरण नहीं हो जाता, तब तक कर्मियों को ₹26,000 मासिक मानदेय दिया जाए। इसके अलावा उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं:
- प्रतिवर्ष 18 दिनों का आकस्मिक अवकाश (CL) और 6 महीने का प्रसूति अवकाश मिलना।
- कार्यस्थल पर सुरक्षा किट और ₹5 लाख का दुर्घटना बीमा कवर सुनिश्चित करना।
- सेवा नियमावली का गठन करना और संयोजिकाओं के लिए भी नियमित मानदेय की व्यवस्था करना।
Jamtara मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
यूनियन के राज्य नेता लखनलाल मंडल और कार्यकारी अध्यक्ष मोहन मंडल ने कहा कि सबसे कम मानदेय पाने वाले इस तबके के साथ प्रशासन और सरकार लगातार छलावा कर रहे हैं। ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग के कारण इन कर्मियों का भविष्य दांव पर लगा है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि इन जायज मांगों पर जल्द ही सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में पूरे जिले की रसोईया-संयोजिकाएं एकजुट होकर एक बड़ा और उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगी। कार्यक्रम के अंत में प्रवीण शरण ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान मैना सिंह, नुनी बाला देवी, पुतुल देवी और सीमा बावरी सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।

