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रिपोर्टर: योगेन्‍द्र सिंह

Haryana : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल हरियाणा के जिलों को लेकर एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। राज्य के कुल 22 जिलों में से 14 जिले वर्तमान में एनसीआर का हिस्सा हैं, लेकिन इनमें से 5 जिलों को जल्द ही इस विशेष सूची से बाहर किया जा सकता है। आगामी 16 जून को होने वाली ‘एनसीआर प्लानिंग बोर्ड’ की उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है।

अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो हरियाणा का एनसीआर क्षेत्र करीब 60 फीसदी तक सिमट जाएगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर सरकार ऐसा क्यों करने जा रही है और इसके पीछे की असली वजह क्या है।

Haryana क्या है NCR और क्यों पड़ी थी इसकी जरूरत?

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर (NCR) की परिकल्पना साल 1985 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली पर बढ़ते आबादी, ट्रैफिक और बुनियादी ढांचे के दबाव को कम करना था। 1951 के बाद दिल्ली में तेजी से हुए औद्योगिक विकास के कारण पड़ोसी राज्यों से भारी संख्या में लोग रोजगार और बेहतर सुविधाओं के लिए यहां पलायन करने लगे।

इस बेकाबू भीड़ को संभालने और दिल्ली के चारों तरफ समान विकास सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई जिलों को मिलाकर एनसीआर बनाया गया ताकि वहां भी दिल्ली जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकें। वर्तमान में इसमें तीनों राज्यों के कुल 24 जिले शामिल हैं, जिनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी (14 जिले) हरियाणा की है।

Haryana कौन से हैं वो 5 जिले और क्या है नया 100 KM का फॉर्मूला?

हरियाणा सरकार के जिस प्रस्ताव पर चर्चा होनी है, उसके तहत करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी को एनसीआर की सीमा से बाहर करने की तैयारी है।

यह पूरी कवायद मुख्य रूप से ‘रीजनल प्लान-2041’ के अंतर्गत की जा रही है, जिसकी रूपरेखा तैयार करने की शुरुआत हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय ऊर्जा व शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल द्वारा की गई थी। इस नए प्रस्ताव के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के दायरे को दिल्ली के राजघाट से केवल 100 किलोमीटर के रेडियस (त्रिज्या) तक ही सीमित रखने की योजना बनाई गई है। यदि यह नया फॉर्मूला पूरी तरह लागू होता है, तो एनसीआर के क्षेत्रफल में भारी कमी आएगी; वर्तमान में हरियाणा के जो 14 जिले इस क्षेत्र का हिस्सा हैं, उनका कुल क्षेत्रफल 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है, जो नए नियमों के बाद सिमटकर मात्र 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर रह जाएगा।

हालांकि, इस सीमा निर्धारण को लेकर पड़ोसी राज्यों के बीच कुछ वैचारिक मतभेद भी उभरकर सामने आए हैं। जहां उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने यह सुझाव दिया है कि उन सभी तहसीलों को एनसीआर में बरकरार रखा जाना चाहिए जिनका थोड़ा बहुत हिस्सा भी 100 किलोमीटर के दायरे में आता है, वहीं दूसरी ओर हरियाणा सरकार का बेहद सख्त रुख है कि केवल उन्हीं तहसीलों को इसमें शामिल किया जाए जो भौगोलिक रूप से पूरी तरह से इस तय दायरे के भीतर आती हैं।

Haryana पाबंदी या वरदान? क्यों एनसीआर से मुक्ति चाहते हैं ये जिले

आमतौर पर किसी भी क्षेत्र का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल होना वहां के चौतरफा विकास की गारंटी माना जाता है, लेकिन दिल्ली से भौगोलिक रूप से काफी दूर स्थित जींद, भिवानी और महेंद्रगढ़ जैसे जिलों के लिए अब यह खास टैग फायदे का सौदा साबित होने के बजाय एक बड़े आर्थिक नुकसान की वजह बन चुका है। इस विपरीत स्थिति के पीछे का सबसे मुख्य कारण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) द्वारा लागू किए गए बेहद कड़े पर्यावरणीय नियम हैं। इन सख्त नियमों के तहत क्षेत्र में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर पूरी तरह से कानूनी पाबंदी लग जाती है, जिसके कारण इन ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों में रहने वाले किसानों और छोटे व्यापारियों का परिवहन बजट पूरी तरह चरमरा जाता है।

इसके अतिरिक्त, प्रदूषण नियंत्रण के इन अत्यधिक कठोर मानकों के चलते दिल्ली से सटे मुख्य शहरों की तुलना में इन दूरदराज के जिलों में नई फैक्ट्रियां स्थापित करना, निर्माण कार्य (कंस्ट्रक्शन) करना और बड़े उद्योग लगाना प्रशासनिक रूप से बेहद जटिल हो गया है, जिसने यहाँ के औद्योगिक विकास की रफ्तार को धीमा कर दिया है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने पर एक तरह से ब्रेक लगा दिया है।

यही वजह है कि हरियाणा सरकार इन पांच जिलों को एनसीआर की बंदिशों से आजाद कर स्थानीय व्यापार और उद्योगों को नई रफ्तार देना चाहती है। अब सभी की नजरें 16 जून को होने वाली बोर्ड की बैठक पर टिकी हैं।

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