रिपोर्टर: नेहा गुप्ता
Arrah : बिहार के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा शहर से चिकित्सा जगत की एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। यहाँ के महावीर टोला (एलआईसी बिल्डिंग के पास) स्थित मेडिकॉन हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर एक व्यक्ति को अपाहिज होने से बचा लिया। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सूर्यकांत निराला ने मरीज के हाथ से करीब 1 किलोग्राम वजनी ट्यूमर को बाहर निकाला है।
Arrah जब डॉक्टरों ने दे दी थी हाथ काटने की सलाह
पीड़ित की पहचान भोजपुर जिले के सहार थाना क्षेत्र के कोरान डिहरी गांव निवासी स्वर्गीय राघव पासवान के 50 वर्षीय पुत्र जगरनाथ पासवान के रूप में हुई है। जगरनाथ पिछले चार वर्षों से अपने बाएं हाथ की कलाई के ऊपर एक बड़े ट्यूमर से परेशान थे। इस समस्या के इलाज के लिए उन्होंने पटना, दानापुर, बिहटा और आरा के कई बड़े डॉक्टरों के चक्कर काटे। कुछ डॉक्टरों ने तो स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हाथ तक काटने की सलाह दे दी थी, लेकिन परिवार इसके लिए तैयार नहीं था। इस बीच पीड़ित ने अंग्रेजी से लेकर आयुर्वेदिक दवाओं तक का सहारा लिया, पर कोई फायदा नहीं हुआ।
Arrah डॉ. सूर्यकांत निराला बने संकटमोचक
निराशा के बीच जगरनाथ की मुलाकात आरा के मेडिकॉन हॉस्पिटल के प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सूर्यकांत निराला से हुई। डॉक्टर ने मरीज की पुरानी रिपोर्ट देखने के बाद कुछ जरूरी जांचें करवाईं और सर्जरी का फैसला लिया।
- सफल ऑपरेशन: डॉ. निराला और उनकी टीम ने बेहद सावधानी से ऑपरेशन कर हाथ को बिना कोई नुकसान पहुंचाए 1 किलो का ट्यूमर सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
- उंगलियां कर रही हैं काम: सबसे बड़ी और राहत की बात यह है कि इतनी बड़ी सर्जरी के बाद भी मरीज के हाथ की सभी उंगलियां पूरी तरह से सामान्य रूप से काम कर रही हैं।
Arrah क्या थी बीमारी? (Nerve Sheath Tumor)
डॉ. सूर्यकांत निराला ने बताया कि यह एक नर्व शीथ ट्यूमर (Nerve Sheath Tumor) था। इसका सीधा मतलब यह है कि यह गांठ नसों (nerves) की बाहरी सुरक्षात्मक परत में विकसित हो गई थी, जो समय के साथ काफी भारी हो चुकी थी। ट्यूमर को आगे की जांच के लिए बायोप्सी के लिए भेज दिया गया है।
डॉक्टर का संदेश: डॉ. निराला ने कहा कि सर्जरी पूरी तरह सफल रही है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस तरह की गंभीर या असाध्य शारीरिक समस्याओं से जूझ रहा है, तो वे एक बार आकर उनसे परामर्श जरूर लें। वे हमेशा मरीजों की सेवा और उनकी तकलीफों को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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