रिपोर्टर: दीनानाथ मौआर
Aurangabad : बिहार के औरंगाबाद सदर अस्पताल के चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने संवेदनशीलता और कर्तव्यपरायणता का एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। अस्पताल स्टाफ ने एक एचआईवी (HIV) संक्रमित गर्भवती महिला का न केवल सुरक्षित प्रसव कराया, बल्कि नवजात शिशु को भी पूरा दुलार और उचित चिकित्सा परामर्श दिया। डॉक्टरों की इस पहल की हर तरफ सराहना हो रही है।
Aurangabad महिला की ईमानदारी और अस्पताल प्रबंधन की त्वरित कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, झारखंड की रहने वाली एक गर्भवती महिला प्रसव के लिए औरंगाबाद सदर अस्पताल पहुंची थी। महिला ने इलाज शुरू होने से पहले ही पूरी ईमानदारी के साथ डॉक्टरों को बता दिया कि वह पहले से ही एचआईवी पॉजिटिव है। इस संवेदनशील मामले को देखते हुए अस्पताल के प्रबंधक डॉ. प्रफुल्ल कांत निराला ने बिना किसी देरी के डॉक्टरों की एक विशेष टीम तैयार की और महिला की देखरेख शुरू कर दी।
Aurangabad सुरक्षित प्रसव के बाद नवजात की विशेष देखभाल
चिकित्सकों की मुस्तैदी के चलते महिला ने एक स्वस्थ और तंदुरुस्त बच्चे को जन्म दिया। हालांकि, जन्म के बाद की गई शुरुआती जांच में नवजात शिशु भी एचआईवी संक्रमित पाया गया। इसके बावजूद अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों ने बिना किसी हिचकिचाहट या भेदभाव के, बच्चे को सामान्य नवजात शिशुओं की तरह ही पूरा स्नेह दिया और उसका जरूरी इलाज शुरू किया। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, फिलहाल मां और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।
Aurangabad “एचआईवी छुआछूत की बीमारी नहीं” – डॉ. प्रफुल्ल कांत
इस सराहनीय कदम की जानकारी देते हुए सदर अस्पताल के प्रबंधक डॉ. प्रफुल्ल कांत निराला ने समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एचआईवी कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है। यह साथ में बैठने, बात करने या भोजन साझा करने से बिल्कुल नहीं फैलती। यह मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंध या संक्रमित खून के आदान-प्रदान से होती है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि ऐसे मरीजों के प्रति हीन भावना रखने के बजाय उनके साथ सामान्य व्यवहार करें और सजग रहें।
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