रिपोर्टर: प्रेम कुमार श्रीवास्तव
Jamshedpur : एक बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट “द सैफायर” को लेकर कानूनी विवाद गहरा गया है। व्यवसायी और निर्माण कंपनी के निदेशक अनूप रंजन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह दावा किया है कि इस प्रोजेक्ट के तहत बनाई जा रही करीब 3.97 एकड़ जमीन उनके पारिवारिक हिस्सेदारी का हिस्सा है, जिस पर लंबे समय से अदालती मामला चल रहा है। अनूप रंजन ने चेतावनी दी है कि इस विवाद के बावजूद ग्राहकों और वित्तीय संस्थानों को अंधेरे में रखकर निवेश और लोन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे आम लोगों की गाढ़ी कमाई डूब सकती है।
Jamshedpur 2013 से कोर्ट में लंबित है जमीन के बंटवारे का मामला
विवादित भूमि मानगो क्षेत्र के वार्ड नंबर-3 (आदित्यपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी थाना संख्या-63) के अंतर्गत आती है। अनूप रंजन के अनुसार, इस जमीन के पारिवारिक बंटवारे को लेकर साल 2013 से ही अदालत में मुकदमा (वाद संख्या 39/2013) चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद साल 2016 में इस विवादित जमीन की पूरी रजिस्ट्री करा ली गई। यही नहीं, 29 मई 2019 को अदालत ने इस जमीन के सही बंटवारे के लिए ‘सर्वे नॉइंग प्लीडर कमिश्नर’ नियुक्त करने का आदेश भी दिया था, लेकिन इसके बाद भी निर्माण कार्य और बैंकिंग प्रक्रियाएं नहीं रोकी गईं।
Jamshedpur सरकारी विभागों, रेरा और हाई कोर्ट तक पहुंचा विवाद
अनूप रंजन ने प्रोजेक्ट से जुड़े कुछ शेयरधारकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी महकमों को गुमराह करके जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) कराने और बिल्डिंग का नक्शा पास कराने की कोशिश की गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के समक्ष भी इस जमीन से जुड़े असली तथ्यों को छुपाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह विवाद झारखंड हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां इस संबंध में एक याचिका (WPC/7576/2025) दायर की गई है।
Jamshedpur अंतिम फैसले तक निवेश और लोन न देने की अपील
प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अनूप रंजन ने सभी आम ग्राहकों, संभावित खरीदारों और बैंकिंग संस्थानों से अपील की है कि वे इस प्रोजेक्ट में किसी भी तरह का पैसा लगाने या होम लोन मंजूर करने से पहले पूरी सावधानी बरतें। उन्होंने कहा कि “द सैफायर” परियोजना फिलहाल पूरी तरह से कानूनी फेरबदल में फंसी हुई है, इसलिए जब तक अदालत का कोई आखिरी फैसला नहीं आ जाता, तब तक सभी जरूरी दस्तावेजों की बारीकी से जांच-पड़ताल कर लेना ही समझदारी होगी। उन्होंने जरूरत पड़ने पर मामले से जुड़े सभी कानूनी दस्तावेज सार्वजनिक करने की बात भी कही है।
ये भी पढ़े: Heart Stress: भीषण गर्मी में बढ़ रहा हार्ट स्ट्रेस, जानिए क्यों दिल के लिए खतरनाक बन रहा है मौसम

