रिपोर्टर: रतन कुमार
Jamtara : झारखंड के जामताड़ा जिले और इसके आसपास के इलाकों में शनिवार को ‘वट सावित्री व्रत’ पूरी श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए सुहागिन महिलाओं ने सुबह से ही उपवास रखकर पारंपरिक परिधानों में पूजा-अर्चना की। विभिन्न मंदिरों और पूजा स्थलों पर वटवृक्ष (बरगद के पेड़) के नीचे महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
Jamtara विधि-विधान से पूजा और वटवृक्ष की परिक्रमा
शनिवार सुबह से ही महिलाएं सोलह शृंगार कर पूजन सामग्री के साथ वटवृक्षों के नीचे जुटने लगी थीं। महिलाओं ने पेड़ की जड़ों में जल अर्पित किया और फल, फूल, रोली, अक्षत, भीगे चने व गुड़ चढ़ाकर माता सावित्री और देवों की आराधना की। इसके बाद, सुख-समृद्धि की मन्नत मांगते हुए महिलाओं ने सूत के कच्चे धागे को वटवृक्ष के तने के चारों ओर लपेटकर परिक्रमा की। इस दौरान पूजा स्थलों पर सामूहिक रूप से सावित्री-सत्यवान की पौराणिक और प्रेरणादायक कथा भी सुनी गई।
Jamtara प्रमुख पूजा स्थलों पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब
जामताड़ा शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही उत्सव जैसा नजारा रहा। प्रसिद्ध मां चंचला मंदिर, दुमका रोड स्थित शिव मंदिर के प्राचीन वटवृक्ष, एसबीआई मुख्य शाखा के निकट हनुमान मंदिर और वीर कुंवर सिंह चौक सहित विभिन्न इलाकों में महिलाओं ने समूह में पूजा की। बरगद के पेड़ में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास होने के कारण इस दिन इसकी पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धूप और उमस के बावजूद महिलाओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।
Jamtara भक्तिमय वातावरण और बाजारों में रही रौनक
मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और पारंपरिक भक्ति गीतों से पूरा जामताड़ा शहर गूंज उठा। इस विशेष अवसर पर मंदिरों के बाहर फल, फूल, बांस के पंखे और पूजन सामग्री की दुकानों पर सुबह से ही काफी चहल-पहल देखी गई, जिससे वहां मेले जैसा दृश्य बन गया। भीड़ नियंत्रण और महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रमुख पूजा स्थलों पर स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों द्वारा सुरक्षा के जरूरी इंतजाम भी किए गए थे।
ये भी पढ़े: Arrah: अखंड सुहाग और निष्ठा का महापर्व है वट सावित्री व्रत, देश भर में महिलाओं ने की वटवृक्ष की पूजा

