Strait of Hormuz : ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गंभीर तनाव के बीच बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण बताया है। ईरान का मानना है कि इस संकट का हल निकालना केवल उसके लिए ही नहीं, बल्कि चीन और पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के हित में है।
Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और चीन की मध्यस्थता पर भरोसा
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने विश्वास व्यक्त किया है कि ट्रंप और जिनपिंग की बैठक में होर्मुज संकट मुख्य मुद्दा होगा। चूँकि चीन दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक है, इसलिए आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाएं बीजिंग को भी आर्थिक चोट पहुँचा रही हैं। ईरान का तर्क है कि अमेरिका की आक्रामक सैन्य नीतियों के कारण तेल और गैस की कीमतों में जो उछाल आया है, उसे नियंत्रित करने के लिए कूटनीतिक दबाव आवश्यक है।
Strait of Hormuz टोल वसूली और समुद्री सुरक्षा पर ईरान का कड़ा रुख
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से टोल लेने के मुद्दे पर तेहरान ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। ईरान का कहना है कि वह प्रदान की जाने वाली समुद्री सेवाओं और सुरक्षा के बदले शुल्क वसूलना जारी रखेगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि ईरान किसी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं कर रहा है, बल्कि अपनी संप्रभुता और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा कर रहा है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि जो देश ईरान विरोधी सैन्य अभियानों का समर्थन करेंगे, उनके लिए इस मार्ग का उपयोग कठिन हो सकता है।
Strait of Hormuz भारतीय जहाजों की रिहाई और परमाणु वार्ता के संकेत
भारत के संदर्भ में ईरान का रुख सकारात्मक दिखाई दिया है। उप विदेश मंत्री ने उम्मीद जताई कि होर्मुज में फंसे 11 भारतीय जहाज जल्द ही अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि ‘तटस्थ’ देशों को कम समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। इसके साथ ही, ईरान ने परमाणु कार्यक्रम सहित सभी विवादित मुद्दों पर बातचीत की इच्छा जताते हुए शांति का द्वार खुला रखा है। वर्तमान में इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही 140 से घटकर नाममात्र रह गई है, जिससे वैश्विक महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
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