Report: Yoganand Shrivastava, Edit: Ravindra Singh
Daboh : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त निर्देशों के बावजूद दबोह कृषि उपज मंडी समिति में पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जहाँ एक ओर सरकार किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने और मंडियों में सुविधाएं सुनिश्चित करने के दावे कर रही है, वहीं दबोह मंडी में खुलेआम चल रहा भ्रष्टाचार इन दावों की पोल खोल रहा है। मंडी प्रशासन की कथित मिलीभगत से न केवल किसानों का शोषण हो रहा है, बल्कि शासन को मिलने वाले करोड़ों रुपये के राजस्व का भी भारी नुकसान हो रहा है।

Daboh मंडी के बाहर अवैध दुकानों का जाल, राजस्व की चोरी
वर्तमान में गेहूं उपार्जन का सीजन चरम पर है, लेकिन दबोह मंडी के प्रांगण से ज्यादा गहमागहमी बाहर सड़क पर नजर आती है। मंडी परिसर के बाहर एक दर्जन से अधिक अवैध दुकानें संचालित हो रही हैं, जहाँ धड़ल्ले से गेहूं की तुलाई की जा रही है। जांच में सामने आया है कि ये अवैध दुकानदार किसानों को बहला-फुसलाकर सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य से कम या औने-पौने दामों पर अनाज खरीद लेते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में मंडी शुल्क (टैक्स) की चोरी की जा रही है, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का चपत लग रही है। आरोप है कि यह सब मंडी प्रभारी के संरक्षण में फल-फूल रहा है।

Daboh बोली का कोई समय नहीं, भीषण गर्मी में परेशान किसान
मंडी प्रांगण के भीतर अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि नीलामी या बोली लगाने का कोई निश्चित टाइम-टेबल ही नहीं है। किसान अपनी उपज लेकर घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। अप्रैल की इस भीषण गर्मी में समय पर बोली न लगने के कारण किसान परेशान होकर बाहर बैठे दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं। व्यापारियों और मंडी अधिकारियों की साठगांठ के चलते बोली प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जाती है, ताकि थक-हारकर किसान अपनी फसल को अवैध केंद्रों पर बेचने के लिए मजबूर हो जाए।

Daboh मूलभूत सुविधाओं का अभाव: प्यासे रहने को मजबूर अन्नदाता
प्रदेश सरकार ने हर मंडी में किसानों के लिए छाया, शीतल पेयजल और शौचालय की व्यवस्था करने के कड़े निर्देश दिए हैं। इसके विपरीत दबोह मंडी में सुविधाओं का नामोनिशान नहीं है। मंडी परिसर में पीने योग्य साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है, शौचालय गंदगी से पटे पड़े हैं और रात के समय लाइट की भी उचित व्यवस्था नहीं रहती। अपनी मेहनत की कमाई बेचने आए अन्नदाता को यहाँ बुनियादी मानवाधिकारों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
Daboh भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी, कार्रवाई की दरकार
दबोह मंडी में व्याप्त इस अव्यवस्था और भ्रष्टाचार ने मंडी प्रभारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठता है कि जब मंडी के ठीक बाहर खुलेआम अवैध तुलाई हो रही है, तो जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों हैं? क्या राजस्व घाटे की भरपाई इन अधिकारियों के वेतन से की जाएगी? स्थानीय किसानों ने जिला प्रशासन और संभाग आयुक्त से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और अवैध दुकानों को बंद करवाकर दोषी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
Also Read This: Bokaro: 42वें एसपी बने नाथू सिंह मीणा, पदभार संभालते ही पुलिस को दी सख्त हिदायत

