Report by: Prem Kumar Srivastwa
Jamshedpur : लौह नगरी जमशेदपुर में इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने सामाजिक संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिदगोड़ा थाना क्षेत्र में हुए एक सड़क हादसे के बाद दो घायल व्यक्ति आधे घंटे तक सड़क पर तड़पते रहे, लेकिन सहायता के लिए किसी का हाथ आगे नहीं बढ़ा।
Jamshedpur थाने के पास ही हुआ हादसा, पर नहीं मिली मदद
घटना सोमवार रात करीब 8 बजे की है। सिदगोड़ा थाना से महज 100-200 मीटर की दूरी पर एक स्कूटी अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में सवार दोनों व्यक्ति गंभीर रूप से घायल होकर बेहोशी की हालत में सड़क पर गिर पड़े। हैरानी की बात यह है कि पुलिस स्टेशन के इतना करीब होने के बावजूद घायलों को समय पर प्राथमिक उपचार या मदद नसीब नहीं हुई।
Jamshedpur संवेदनहीनता की हद: एंबुलेंस और ऑटो ने भी मोड़ा मुंह
हादसे के बाद का मंजर समाज की संवेदनहीनता का गवाह बना। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब 30 मिनट तक घायल लहूलुहान अवस्था में बीच सड़क पर पड़े रहे। इस दौरान दर्जनों लोग और ऑटो चालक वहां से गुजरे, लेकिन किसी ने भी उन्हें अस्पताल पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई। हद तो तब हो गई जब मौके से एक एंबुलेंस भी गुजरी, लेकिन चालक ने रुककर घायलों को उठाना जरूरी नहीं समझा।
Jamshedpur ‘तमाशबीन’ बना समाज, सुरक्षा और कानून का डर?
अक्सर सड़क हादसों में लोग पुलिसिया कार्रवाई या कानूनी पचड़ों के डर से मदद करने से कतराते हैं, लेकिन सरकार के ‘गुड सेमेरिटन’ (नेक मददगार) कानून के बावजूद इस तरह की उदासीनता चिंताजनक है। यदि घायलों को उन शुरुआती ‘गोल्डन आवर्स’ में मदद मिल जाती, तो उनकी स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
Jamshedpur मानवता पर गहरे सवाल
यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक सोच का गिरता स्तर है। व्यस्त सड़क पर आधे घंटे तक दो जिंदगियों का तड़पना और सैकड़ों लोगों का मूकदर्शक बने रहना यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम एक मशीनी समाज में तब्दील हो चुके हैं? जरूरत है कि हम दुर्घटना के समय केवल वीडियो बनाने या तमाशा देखने के बजाय, एक जिम्मेदार नागरिक की तरह किसी की जान बचाने को प्राथमिकता दें।
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