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Maharashtra : भारतीय संगीत जगत का एक सुनहरा अध्याय आज हमेशा के लिए बंद हो गया। अपनी जादुई आवाज़ से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली, जिसके बाद आज मुंबई के शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके पुत्र आनंद भोसले ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस भावुक क्षण में वहां मौजूद हर आंख नम थी और फिजाओं में सिर्फ ‘आशा ताई अमर रहें’ के नारे गूंज रहे थे।

Maharashtra अंतिम विदाई: गीतों के साये में विदा हुईं आशा ताई

आशा भोसले का अंतिम सफर किसी शोक सभा जैसा नहीं, बल्कि संगीत के एक उत्सव जैसा प्रतीत हुआ। जैसा उनका जीवंत व्यक्तित्व था, वैसी ही उनकी विदाई भी गरिमामय रही। अंतिम संस्कार के दौरान संगीत जगत की जानी-मानी हस्तियों जैसे शान और अनूप जलोटा ने उनके ही सदाबहार गीतों को गाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यह एक दुर्लभ और हृदयस्पर्शी नजारा था, जहां एक महान कलाकार को विदा करने के लिए संगीत को ही माध्यम बनाया गया। शिवाजी पार्क में उमड़ी भारी भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि आशा ताई ने केवल गाने नहीं गाए, बल्कि लोगों की यादों में अपनी जगह बनाई थी।

Maharashtra स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां और अंतिम क्षण

पिछले कुछ समय से आशा ताई बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से संघर्ष कर रही थीं। उन्हें 11 अप्रैल को सांस लेने में गंभीर तकलीफ के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तुरंत आईसीयू (ICU) में स्थानांतरित किया गया। विशेषज्ञों की टीम ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों के अनुसार, मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण उनका निधन हुआ। रविवार को उनके जाने की खबर ने देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में फैले उनके प्रशंसकों को स्तब्ध कर दिया।

Maharashtra सितारों का हुजूम और राजकीय सम्मान

आशा ताई को अंतिम नमन करने के लिए राजनीति, खेल और फिल्म जगत की तमाम बड़ी हस्तियां उमड़ पड़ीं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। बॉलीवुड से एआर रहमान, शबाना आजमी, रणवीर सिंह, तब्बू, विक्की कौशल, और जैकी श्रॉफ जैसे सितारे पहुंचे। वहीं खेल जगत से सचिन तेंदुलकर और मोहम्मद सिराज ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पुराने साथियों में हेलन और अनुराधा पौडवाल की मौजूदगी ने माहौल को और भी गमगीन कर दिया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जो उनके देश के प्रति योगदान का सम्मान था।

Maharashtra संघर्ष से शिखर तक: 12,000 गीतों का सफर

आशा भोसले का जीवन उन सभी के लिए प्रेरणा है जो संघर्ष से घबराते हैं। उन्होंने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साये से निकलकर अपनी एक अलग पहचान बनाई। मराठी फिल्म के गीत ‘चला चला नव बाल’ से शुरू हुआ उनका सफर 12,000 से अधिक गानों तक पहुंचा। उन्होंने न केवल हिंदी, बल्कि बंगाली, मराठी और कई विदेशी भाषाओं में भी अपनी गायकी का लोहा मनवाया। 16 साल की उम्र में फिल्म ‘रात की रानी’ से मिली सोलो पहचान ने उन्हें वह मुकाम दिया, जहां से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज भले ही वह भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़ आने वाली कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।

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