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Report by: Yogendra Singh

Vrindavan : धर्मनगरी वृंदावन में यमुना की सैर उस वक्त मातम में बदल गई, जब पर्यटकों से भरी एक नाव बीच नदी में पलट गई। इस भीषण हादसे में अब तक 11 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 5 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए नाविक और ठेकेदार को सलाखों के पीछे भेज दिया है। लापरवाहियों की लंबी फेहरिस्त ने इस त्रासदी को और भी गंभीर बना दिया है।

Vrindavan क्षमता से अधिक सवारी और कमाई का लालच बना मौत का कारण

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह हादसा प्राकृतिक कम और मानवीय भूल ज्यादा था। नाव की वहन क्षमता से लगभग दोगुने यात्रियों को उसमें बिठाया गया था। अधिक मुनाफे के चक्कर में नाविक ने सुरक्षा नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया। जैसे ही नाव नदी के गहरे और तेज बहाव वाले हिस्से में पहुंची, संतुलन बिगड़ने के कारण वह पलट गई। आसपास मौजूद लोगों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन ओवरलोडिंग की वजह से कई लोग गहरे पानी से बाहर नहीं निकल सके।

Vrindavan सुरक्षा मानकों की अनदेखी: नाविक और ठेकेदार पर गिरी गाज

हादसे के बाद प्रशासन ने जब जांच शुरू की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। नाव पर न तो लाइफ जैकेट मौजूद थे और न ही आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई अन्य जीवन रक्षक उपकरण। जिला प्रशासन ने इसे ‘आपराधिक लापरवाही’ करार देते हुए नाविक और घाट के ठेकेदार को तुरंत गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया होता, तो इस त्रासदी को टाला जा सकता था।

Vrindavan यमुना में रेस्क्यू ऑपरेशन: लापता लोगों की तलाश जारी

एनडीआरएफ (NDRF) और स्थानीय गोताखोरों की टीमें लगातार यमुना नदी में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। लापता 5 लोगों की तलाश में गोताखोरों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। नदी के बहाव और पानी के मटमैले होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में चुनौतियां आ रही हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि जब तक आखिरी व्यक्ति का पता नहीं चल जाता, बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी रहेगा।

Vrindavan स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों में प्रशासन के प्रति आक्रोश

इस दर्दनाक हादसे ने स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। लोगों का आरोप है कि घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। ठेकेदारों की मनमानी और प्रशासनिक निगरानी के अभाव के कारण तीर्थयात्रियों की जान खतरे में रहती है। घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ भविष्य के लिए नई गाइडलाइंस जारी करने के निर्देश दिए हैं।

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