Gwalior : अंतरराष्ट्रीय पटल पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब आम आदमी की थाली पर पड़ने लगा है। वैश्विक स्तर पर गैस आपूर्ति प्रभावित होने के कारण ग्वालियर शहर में संचालित होने वाली चार प्रमुख ‘दीनदयाल रसोई’ में से तीन बंद हो गई हैं। प्रशासन भले ही सिलेंडर की उपलब्धता का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गैस की भारी किल्लत के चलते जरूरतमंदों को मिलने वाले सस्ते भोजन पर संकट मंडरा रहा है।
सिलेंडर की कटौती: 10 से घटकर 2 पर पहुँची संख्या
Gwalior नगर निगम द्वारा संचालित इन रसोई केंद्रों को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रतिदिन औसतन 8 से 10 सिलेंडरों की आवश्यकता होती है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में आपूर्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई है:
- 13 मार्च: आपूर्ति घटकर केवल 5 सिलेंडर रह गई।
- शनिवार: स्थिति और बिगड़ गई और निगम को मात्र 2 सिलेंडर प्राप्त हुए।
- वर्तमान स्थिति: गैस की कमी के कारण झांसी रोड बस स्टैंड सहित तीन केंद्रों की रसोई पूरी तरह बंद कर दी गई है। वर्तमान में केवल अंतरराज्यीय बस स्टैंड स्थित मुख्य रसोई चालू है, जहाँ से अन्य केंद्रों के लिए सीमित मात्रा में भोजन भेजा जा रहा है।
भोजन के आंकड़ों में भारी गिरावट: 65% तक कम हुई मांग
Gwalior सिलेंडर की कमी का सीधा असर भोजन वितरण की संख्या पर पड़ा है। पाँच दिन पहले तक जहाँ चारों केंद्रों को मिलाकर हजारों लोग भोजन कर रहे थे, अब वह संख्या सिमट कर रह गई है:
- पहले की स्थिति: प्रतिदिन औसतन 3,670 थालियाँ परोसी जा रही थीं।
- वर्तमान स्थिति: वर्तमान में यह संख्या घटकर केवल 1,446 रह गई है।
- असर: मांग में लगभग 60 से 65 प्रतिशत की कमी आई है, जिसका मुख्य कारण केंद्रों का बंद होना और भोजन बनाने की सीमित क्षमता है। राजपाएगा और इंटक मैदान जैसे क्षेत्रों में अब बस स्टैंड से ही खाना बनाकर पहुँचाया जा रहा है।
प्रशासनिक रुख और भविष्य की चिंता
Gwalior अपर आयुक्त (नगर निगम) प्रदीप तोमर ने स्वीकार किया है कि पिछले दो-तीन दिनों से रसोई के लिए पर्याप्त गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी कारण से अधिकांश किचन बंद रखने पड़े हैं और केवल एक ही स्थान से भोजन की व्यवस्था की जा रही है।
Warning: यदि गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो शहर की एकमात्र चालू रसोई (बड़े बस स्टैंड) पर भी ताला लग सकता है। इससे शहर के दिहाड़ी मजदूरों और जरूरतमंदों के सामने भोजन का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
प्रशासन अब गैस एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाकर व्यवस्था को पुनः पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, ताकि “कोई भूखा न सोए” के संकल्प को जारी रखा जा सके।
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