By: Yogendra Singh
Buddhist Tourism : बिहार सरकार ने बौद्ध सर्किट टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में भारतीय दूतावास, फनोम पेन्ह, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय और बिहार पर्यटन विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य बिहार के बौद्ध स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करना और विशेष रूप से कंबोडिया से पर्यटकों को आकर्षित करना था।
बिहार में बौद्ध स्थलों का वैश्विक नेटवर्क
Buddhist Tourism बैठक में बिहार के प्रमुख बौद्ध स्थलों की जानकारी साझा की गई। इसमें बोधगया, वैशाली, पटना, राजगीर, नालंदा, भागलपुर (विक्रमशिला), केसरिया, लौरिया नंदनगढ़, रामपुरवा और जहानाबाद शामिल हैं। सचिव श्री निलेश रामचंद्र देवरे ने बताया कि बोधगया में महाबोधि मंदिर क्षेत्र में कॉरिडोर निर्माण की योजना है, जबकि केसरिया में स्तूपों की प्रतिकृति विकसित की जा रही है। वैशाली में सम्यक स्तूप का निर्माण हुआ है और पटना में पाटलिपुत्र करुणा स्तूप और विपश्यना केंद्र तैयार किए गए हैं। राजगीर स्थित वेणुवन का सौंदर्यीकरण कराया गया है और भागलपुर में विक्रमशिला विश्वविद्यालय का पुनर्निर्माण कार्य प्रगति पर है।
सचिव देवरे ने बताया कि बिहार बौद्ध धर्म का मूल केंद्र है, जहां गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया और मानवता को शांति तथा करुणा का संदेश दिया। इस ऐतिहासिक महत्व के कारण बिहार अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटकों के लिए आकर्षक गंतव्य बन रहा है।
कंबोडिया से पर्यटकों को विशेष आमंत्रण
Buddhist Tourism बैठक में कंबोडिया के अधिकारियों और पर्यटन निवेशकों को बिहार के बौद्ध स्थलों के बारे में जानकारी दी गई। कंबोडिया में लगभग 1.80 करोड़ की जनसंख्या के बौद्ध अनुयायी हैं, जो बिहार के पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण लक्षित समूह हैं। कंबोडियाई पर्यटकों को 10 से 30 दिनों की विशेष भ्रमण योजना के तहत आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा, बोधगया में कंबोडियन फूड रेस्टोरेंट खोलने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि विदेशी पर्यटकों को सांस्कृतिक रूप से अनुकूल वातावरण मिले।
संयुक्त पहलों और ब्रांडिंग
Buddhist Tourism बैठक के दौरान संयुक्त ब्रांडिंग पहलें जैसे “Know Bihar Program” और “अंकोरवाट से बोधगया” पर सहमति बनी। कंबोडिया सरकार के प्रतिनिधियों ने इन प्रस्तावों का समर्थन किया और बौद्ध सर्किट टूरिज्म को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहयोग देने का भरोसा दिया।
बिहार पर्यटन विभाग का उद्देश्य है कि बिहार के बौद्ध स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाए और राज्य की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का योगदान बढ़े। इस पहल से न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार और अवसर भी मिलेंगे।
निष्कर्ष:
बिहार में बौद्ध सर्किट टूरिज्म परियोजना से राज्य के बौद्ध स्थलों की वैश्विक पहचान बढ़ेगी। कंबोडियाई पर्यटकों के लिए विशेष योजनाएं और सुविधाएं विकसित करने से बिहार को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख गंतव्य बनाने में मदद मिलेगी। यह कदम बिहार के पर्यटन क्षेत्र के लिए नए अवसर और संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगा।
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