पूजा के समय अवश्य पढ़ें यह पावन व्रत कथा
Vinayaka Chaturthi : फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश के ढुण्ढिराज स्वरूप को समर्पित मानी जाती है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ही विनायकी गणेश चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करने से बुद्धि, सुख-समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है।
विनायकी गणेश चतुर्थी 2026 की तिथि
Vinayaka Chaturthi पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी तिथि का आरंभ 20 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 38 मिनट से होगा और इसका समापन 21 फरवरी को दोपहर 1 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार यह व्रत 21 फरवरी 2026, शनिवार को रखा जाएगा।
विनायकी गणेश चतुर्थी व्रत कथा
Vinayaka Chaturthi पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नर्मदा नदी के तट पर विराजमान थे। शांत वातावरण में माता पार्वती ने शिवजी से चौपड़ खेलने की इच्छा प्रकट की। शिवजी ने सहमति दी, लेकिन वहां कोई तीसरा व्यक्ति उपस्थित नहीं था जो खेल का निर्णय कर सके।
तब शिवजी ने तिनकों से एक बालक का निर्माण कर उसमें प्राण स्थापित किए और उसे निष्पक्ष निर्णायक बनने का आदेश दिया। इसके बाद चौपड़ का खेल तीन बार खेला गया और तीनों बार माता पार्वती विजयी रहीं। किंतु जब निर्णय का समय आया, तो बालक ने शिवजी को विजेता घोषित कर दिया।
यह सुनकर माता पार्वती क्रोधित हो उठीं और उन्होंने बालक को लंगड़ा होकर कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दे दिया। बालक ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए क्षमा मांगी। तब देवी ने कहा कि कुछ समय बाद नाग कन्याएं वहां आएंगी और वे उसे गणेश व्रत की विधि बताएंगी। उस व्रत के प्रभाव से उसके कष्ट दूर हो जाएंगे।
एक वर्ष बाद नाग कन्याओं ने उसे गणेश व्रत का विधान बताया। बालक ने 21 दिनों तक श्रद्धापूर्वक भगवान गणेश का व्रत किया। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी प्रकट हुए और वर मांगने को कहा। बालक ने कैलाश पर्वत तक चलकर पहुंचने की शक्ति मांगी। गणेश जी ने उसे आशीर्वाद दिया।
बालक कैलाश पहुंचा और पूरी घटना शिवजी को सुनाई। उसी समय से माता पार्वती शिवजी से नाराज थीं। तब शिवजी ने भी 21 दिनों तक विनायक व्रत किया, जिससे माता पार्वती का क्रोध शांत हो गया।
इसके बाद माता पार्वती ने भी अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा से 21 दिन तक गणेश व्रत किया। व्रत पूर्ण होने पर कार्तिकेय स्वयं उनके दर्शन के लिए आए। तभी से यह व्रत मनोकामना पूर्ति का व्रत माना जाता है।
व्रत का महत्व
- यह व्रत विघ्नों को दूर करने वाला माना गया है।
- श्रद्धा से पूजा और कथा पाठ करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- 21 दिनों के व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।
Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल आस्था संबंधी जानकारी प्रदान करना है।
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